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'ममता ही तृणमूल': AITC अध्यक्ष की नियुक्ति पर मोइत्रा ने साधा निशाना, कहा- फिर लड़े चुनाव, ताकत पला चल जाएगी
Tue, 23 Jun 2026 08:03 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 23 Jun 2026 08:03 PM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने अरूप रॉय को एआईटीसी चेयरपर्सन बनाए जाने के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस हैं। उन्होंने कहा कि सभी विधायक और सांसद ममता के नाम पर चुने गए हैं। महुआ ने बागी नेताओं को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने की चुनौती दी। साथ ही उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल और तृणमूल नेताओं की गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाए। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
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महुआ मोइत्रा का बयान।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी उठापटक के बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए महुआ मोइत्रा ने अरूप रॉय को एआईटीसी का चेयरपर्सन बनाए जाने के दावों पर निशाना साधा और कहा कि ममता बनर्जी ही तृणमूल कांग्रेस हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह और जनाधार सब कुछ ममता बनर्जी के नेतृत्व से जुड़ा है। महुआ ने यह भी चुनौती दी कि अगर किसी को अपनी ताकत पर भरोसा है तो वह इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़कर दिखाए।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी है और पार्टी के सभी विधायक तथा सांसद उनके नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कुछ भी दावा कर सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक हकीकत नहीं बदलती। महुआ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई भी खुद को कुछ भी घोषित कर सकता है, लेकिन जनता का फैसला सबसे अहम होता है। उन्होंने कहा कि अगर 65 विधायक अपनी ताकत साबित करना चाहते हैं तो वे इस्तीफा दें, पार्टी का नया नाम रखें और फिर चुनाव मैदान में उतरें।
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महुआ मोइत्रा के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं, जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं और विपक्ष के आरोपों के बीच महुआ के बयान को तृणमूल नेतृत्व के पक्ष में एक मजबूत राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकता है।
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महुआ मोइत्रा ने कहा कि भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस ममता बनर्जी की पार्टी है और पार्टी के सभी विधायक तथा सांसद उनके नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कुछ भी दावा कर सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक हकीकत नहीं बदलती। महुआ ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई भी खुद को कुछ भी घोषित कर सकता है, लेकिन जनता का फैसला सबसे अहम होता है। उन्होंने कहा कि अगर 65 विधायक अपनी ताकत साबित करना चाहते हैं तो वे इस्तीफा दें, पार्टी का नया नाम रखें और फिर चुनाव मैदान में उतरें।
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अरूप रॉय की नियुक्ति पर महुआ ने क्या उठाए सवाल?
अरूप रॉय को एआईटीसी का चेयरपर्सन बनाए जाने की खबरों पर महुआ मोइत्रा ने इसे "थिएटर ऑफ द एब्सर्ड" यानी बेतुके नाटक जैसा बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन हैं और वही पार्टी की पहचान हैं। महुआ ने कहा कि पार्टी का हर जनप्रतिनिधि ममता बनर्जी के नाम और उनके नेतृत्व की वजह से निर्वाचित हुआ है। ऐसे में किसी दूसरे नेतृत्व का दावा राजनीतिक रूप से टिकाऊ नहीं है।क्या भाजपा और केंद्रीय एजेंसियों पर भी बोलीं महुआ?
महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब ममता बनर्जी पहली बार 2011 में सत्ता में आई थीं, तब उन्होंने 'बदला नहीं, बदलाव चाहिए' का नारा दिया था। महुआ का आरोप है कि 2021 के बाद केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय केंद्र सरकार के पास सीबीआई और अन्य एजेंसियों का नियंत्रण था, लेकिन बहुत कम मामलों में दोष सिद्ध हो सका।गिरफ्तारियों को लेकर क्या आरोप लगाए?
तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया कि चार मई के बाद से ऐसा कोई दिन नहीं गया, जब किसी तृणमूल नेता या मंत्री को गिरफ्तार नहीं किया गया हो। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बिना अदालत की प्रक्रिया पूरी किए सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं किया जा सकता। महुआ ने कहा कि कानून का पालन अदालतों के जरिए होना चाहिए और किसी भी कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।महुआ मोइत्रा के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं, जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्ष के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं और विपक्ष के आरोपों के बीच महुआ के बयान को तृणमूल नेतृत्व के पक्ष में एक मजबूत राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकता है।