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बंगाल में भाजपा को रोकने के लिए नरम हिंदुत्व का दांव चल रही ममता सरकार
Tue, 22 Sep 2020 06:15 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 22 Sep 2020 06:15 AM IST
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस नरम हिंदुत्व का दांव चल रही है। ममता बनर्जी सरकार की 8,000 ब्राह्मण पुजारियों को हर महीने एक हजार रुपये भत्ता और मुफ्त आवास देने की पहल को मुस्लिम समर्थक छवि से निकलने की कोशिश मानी जा रही है।
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वाम मोर्चा को हराकर सत्ता में वापसी के एक साल बाद 2012 में तृणमूल ने मस्जिदों के इमाम को हर महीने 25,00 रुपये और मुअज्जिन को 15,00 रुपये भत्ता देने की व्यवस्था बनाई। दरअसल, तृणमूल बंगाल में तकरीबन 30 फीसदी आबादी को साधना चाहती थी। हालांकि, 2013 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सरकार के इस फैसले को असांविधानिक और जनहित के खिलाफ बताया था।
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इसके बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया। भाजपा की ओर से ममता पर लगातार अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सौगत रॉय ने कहा, हम भाजपा की तरह सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं रखते हैं।
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हमारा मकसद पीड़ित व्यक्तियों और समुदायों की सहायता करना है। पार्टी का कोई धार्मिक एजेंडा नहीं है। वहीं, पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता ने कहा, भाजपा हमें हिंदू विरोधी कहकर प्रचारित करती रही है। उनके सदस्य खुद को हिंदुत्व के सबसे बडे़ ठेकेदार बताते हैं, इसलिए हमने समावेशी विकास के संदेश के साथ जनता के बीच, विशेषकर हिंदू समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने का निर्णय लिया।
प्रशांत किशोर के कहने पर ब्राह्मण सम्मेलन
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस बार ममता बनर्जी के सलाहकार बने हैं। प्रशांत और उनकी टीम ने चुनावी बढ़त लेने के लिए ममता बनर्जी को ब्राह्मण सम्मेलन कराने और हिंदू पुजारियों को रियायतें दिए जाने की सलाह दी है। तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने ममता की समावेशी राजनीति और नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी फैलाने के लिए लगन से काम किया है।