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टिक टॉक ऐप: मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
Tue, 09 Apr 2019 11:35 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 09 Apr 2019 11:35 AM IST
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टिक टॉक ऐप (फाइल फोटो)
उच्चतम न्यायालय ‘टिक टॉक’ ऐप पर प्रतिबंध लगाने का केंद्र को निर्देश देने संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिका पर 15 अप्रैल को सुनवाई करने के लिए मंगलवार को राजी हो गया। अदालत ने इस ऐप के जरिए अश्लील सामग्री तक पहुंच को लेकर व्याप्त चिंताओं के मद्देनजर यह निर्देश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ चीनी कंपनी बाइटडांस की याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गई। इस कंपनी ने कहा है कि इस ऐप को एक अरब से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एकतरफा आदेश दे दिया था।
उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तीन अप्रैल को केंद्र को निर्देश दिया था कि मोबाइल ऐप्लीकेशन ‘टिक टॉक’ पर प्रतिबंध लगाए। उसने ऐसे ऐप्स के जरिए ‘अश्लील और अनुचित सामग्री’ उपलब्ध कराए जाने पर चिंता जताई थी।
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उच्च न्यायालय ने मीडिया को टिक टॉक के साथ बनाए गए वीडियो क्लिप्स का प्रसारण नहीं करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने उस जनहित याचिका के आधार पर अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस आधार पर टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी कि इसमें कथित रूप से ऐसी सामग्री है जो 'संस्कृति का अपमान तथा अश्लील सामग्री को बढ़ावा’ देती है।
इसके अलावा अदालत ने कहा था कि सरकार टिक टॉक के वीडियो को फेसबुक जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर होने से भी रोके। टिक टॉक के वीडियोज में अश्लील सामग्री को लेकर हमेशा से लोगों की शिकायत रही है। अदालत ने सरकार से पूछा था कि क्या वह ऐसा कोई कानून लाएगी जिससे बच्चों को साइबर क्राइम बचाया जा सके और उन्हें इससे दूर रखा जा सके। इस ऐप के जरिए उपभोक्ता छोटे वीडियो बना सकते हैं और उसे साझा कर सकते हैं।
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ चीनी कंपनी बाइटडांस की याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गई। इस कंपनी ने कहा है कि इस ऐप को एक अरब से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है और उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एकतरफा आदेश दे दिया था।
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उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने तीन अप्रैल को केंद्र को निर्देश दिया था कि मोबाइल ऐप्लीकेशन ‘टिक टॉक’ पर प्रतिबंध लगाए। उसने ऐसे ऐप्स के जरिए ‘अश्लील और अनुचित सामग्री’ उपलब्ध कराए जाने पर चिंता जताई थी।
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उच्च न्यायालय ने मीडिया को टिक टॉक के साथ बनाए गए वीडियो क्लिप्स का प्रसारण नहीं करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने उस जनहित याचिका के आधार पर अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस आधार पर टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी कि इसमें कथित रूप से ऐसी सामग्री है जो 'संस्कृति का अपमान तथा अश्लील सामग्री को बढ़ावा’ देती है।
इसके अलावा अदालत ने कहा था कि सरकार टिक टॉक के वीडियो को फेसबुक जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर होने से भी रोके। टिक टॉक के वीडियोज में अश्लील सामग्री को लेकर हमेशा से लोगों की शिकायत रही है। अदालत ने सरकार से पूछा था कि क्या वह ऐसा कोई कानून लाएगी जिससे बच्चों को साइबर क्राइम बचाया जा सके और उन्हें इससे दूर रखा जा सके। इस ऐप के जरिए उपभोक्ता छोटे वीडियो बना सकते हैं और उसे साझा कर सकते हैं।
Supreme Court to hear on April 15 an appeal filed against Madras High Court order banning TikTok app. pic.twitter.com/vXPwwBL1A1
— ANI (@ANI) April 9, 2019