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ब्रह्मपुत्र नदी में फंसा बाघ: संकरी चट्टानों के बीच ली शरण, वन विभाग को बचाव अभियान चलाने में लगे 10 घंटे
Wed, 21 Dec 2022 09:36 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 21 Dec 2022 09:36 PM IST
सार
वन अधिकारियों के मुताबिक, इस बात की संभावना है कि यह बाघ करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर दरांग जिले के ओरंग नेशनल पार्क से भटककर पानी पीते समय ब्रह्मपुत्र की तेज धारा में बह गया हो।
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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के मयूर द्वीप पर उमानंद मंदिर के भक्तों और पुजारियों ने मंगलवार की सुबह मंदिर के पास बाघ देखा। यह बाघ ब्रह्मपुत्र जैसी नदी में फंसने के बाद मयूर द्वीप पर पहुंचा। उसने मयूर द्वीप की चट्टानों के बीच शरण ले रखी थी।
वन अधिकारियों के मुताबिक, इस बात की संभावना है कि यह बाघ करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर दरांग जिले के ओरंग नेशनल पार्क से भटककर पानी पीते समय ब्रह्मपुत्र की तेज धारा में बह गया हो।
उमानंद मंदिर मयूर द्वीप में पहाड़ी के ऊपर स्थित है। मंदिर पहुंचे भक्तों और पुजारियों ने जब बाघ को देखा तो वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद पशु चिकित्सकों सहित एक बचाव दल नावों में चट्टानों के पास पहुंचा।
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अधिकारियों ने बताया, वन विभाग को बचाव अभियान में 10 घंटे से ज्यादा समय लगा। बचाव अभियान को बहुत ही सावधानी से चलाया गया। पुजारियों सहित अन्य भक्तों और पर्यटकों को एनडीआरएफ के जवानों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वनकर्मियों को बाघ को काबू करने में काफी परेशानी हुई।
बाघ के नदी में डूबने का खतरा था। वह नदी के किनारे चट्टानों के बीच था। इसका भी डर था कि बाघ बचाव दल के सदस्यों पर हमला न कर दे। चट्टानों के बीच जगह बहुत संकरी थी। बाद में बाघ को पिंजरे में डालकर रेस्क्यू किया गया। पशु चिकित्सक बाघ की अच्छी तरह से जांच करेंगे।
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वन अधिकारियों के मुताबिक, इस बात की संभावना है कि यह बाघ करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर दरांग जिले के ओरंग नेशनल पार्क से भटककर पानी पीते समय ब्रह्मपुत्र की तेज धारा में बह गया हो।
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उमानंद मंदिर मयूर द्वीप में पहाड़ी के ऊपर स्थित है। मंदिर पहुंचे भक्तों और पुजारियों ने जब बाघ को देखा तो वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद पशु चिकित्सकों सहित एक बचाव दल नावों में चट्टानों के पास पहुंचा।
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अधिकारियों ने बताया, वन विभाग को बचाव अभियान में 10 घंटे से ज्यादा समय लगा। बचाव अभियान को बहुत ही सावधानी से चलाया गया। पुजारियों सहित अन्य भक्तों और पर्यटकों को एनडीआरएफ के जवानों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वनकर्मियों को बाघ को काबू करने में काफी परेशानी हुई।
बाघ के नदी में डूबने का खतरा था। वह नदी के किनारे चट्टानों के बीच था। इसका भी डर था कि बाघ बचाव दल के सदस्यों पर हमला न कर दे। चट्टानों के बीच जगह बहुत संकरी थी। बाद में बाघ को पिंजरे में डालकर रेस्क्यू किया गया। पशु चिकित्सक बाघ की अच्छी तरह से जांच करेंगे।