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CAPF: अर्धसैनिक बलों की लंबित मांगों के लिए जंतर-मंतर पर होगी भूख हड़ताल, एक्स पैरा मिलिट्री एसोसिएशन का एलान

Sat, 22 Aug 2026 07:11 PM IST
शिवम गर्ग डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 22 Aug 2026 07:11 PM IST
सार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मांगों को लेकर एक्स पैरा मिलिट्री एसोसिएशन ने 12 से 18 नवंबर तक जंतर-मंतर पर सांकेतिक भूख हड़ताल का एलान किया है। महासचिव रणबीर सिंह ने पुरानी पेंशन बहाली और नए सीएपीएफ कानून की वापसी की मांग उठाई। क्या हैं अन्य मांगें? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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CAPF Protest: Ex-Paramilitary Association Announces Seven-Day Hunger Strike at Jantar Mantar
पुरानी पेंशन बहाली की मांग फिर तेज - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन बहाली व सीएपीएफ के नए कानून की वापसी को लेकर जंतर-मंतर पर सात दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल की जाएगी। अलायन्स ऑफ ऑल एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा शनिवार को यह ऐलान किया गया है। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अर्धसैनिक बलो की जायज मांगों के प्रति लगातार बेरुखी व सौतेला व्यवहार देखने को मिल रहा है। 

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12 नवंबर से 18 नवंबर तक होगी भूख हड़ताल
यह फैसला अलायन्स के कोर कमेटी मेम्बर्स द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया है। रणबीर सिंह के मुताबिक, 12 नवंबर से 18 नवंबर 2026 तक सात दिन के लिए जंतर-मंतर पर धरना/सांकेतिक भूख हड़ताल की जाएगी। एसोसिएशन द्वारा केंद्रीय बलों की विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 11 वर्षों से लगातार सड़कों पर संघर्ष किया जा रहा है। सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। ऐसा पहली बार होगा, जब देश भर के सैकड़ों पैरा मिलिट्री परिवार सात दिन के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे। 
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सीएपीएफ जवानों के हकों की बात नहीं सुन रही सरकार
11 वर्षों के दौरान एसोसिएशन की तरफ से सैंकड़ों ज्ञापन प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृह मंत्री को भेजे गए हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। संसद भवन से लेकर सरहदों की चाक चौबंद सुरक्षा करने वाले सीएपीएफ जवानों के हकों की बात, सरकार नहीं करना चाहती। पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने कभी भी एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल को बातचीत के लिए नहीं बुलाया। ऐसी स्थिति में पूर्व अर्धसैनिकों और सीएपीएफ परिवारों के पास जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन एवं सांकेतिक भूख हड़ताल के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचा है।
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अदालतों के फैसलों को लागू नहीं किया जा रहा
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार, अदालतों के फैसलों को भी लागू नहीं कर रही। बुढ़ापे की लाठी यानी 'पुरानी पेंशन बहाली'  का फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2023 को सुनाया था। उस फैसले में हाईकोर्ट ने सीएपीएफ को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' मानते हुए ओपीएस लागू करने की बात कही थी। इस फैसले के खिलाफ, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई। अभी तक वह फैसला लंबित है।  

नया एक्ट ही पारित करा दिया
सर्वोच्च अदालत ने 23 मई 2025 को कैडर अधिकारियों बाबत अपने फैसले में कहा था कि आईपीएस अधिकारियों के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'ओजीएएस पैटर्न' लागू किया जाए। शीर्ष अदालत ने सरकार को 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। इन बलों में आईपीएस के चलते कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव देखने को मिल रहा है। इस फैसले के खिलाफ सरकार ने संसद में नया सीएपीएफ एक्ट पारित करा दिया। सीएपीएफ के पूर्व कैडर अफसर इसे 'काला कानून' बता रहे हैं।    


काला कानून वापस ले सरकार
सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा जब सरकार किसानों के लिए लाए गए तीन काले कानून वापस ले सकती है, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटा सकती है तो फिर ये सीएपीएफ का काला कानून वापस क्यों नहीं लिया जा सकता। ओपीएस, ओजीएएस व दूसरे हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर एसोसिएशन द्वारा विभिन्न राज्यों का दौरा किया जाएगा। राज्यों की राजधानियों में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर लोगों को सीएपीएफ जवानों व कैडर अफसरों के प्रति सरकार के सौतेले व्यवहार के बारे में जानकारी दी जाएगी। 

अलग से 'पे कमीशन' का प्रस्ताव
आईटीबीपी के पूर्व आईजी आनंद निंबाड़िया ने कहा, हम सरकार से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए अलग से ट्रिब्यूनल की मांग करते हैं। इसके साथ ही अलग से 'पे कमीशन' का प्रस्ताव रखते हैं। एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष वीएस कदम ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जो सरकार अर्धसैनिक झंडा दिवस 'कोष' का गठन नहीं कर सकती, राज्यों में पैरा मिलिट्री परिवारों के कल्याण एवं पुनर्वास के लिए राज्यों में अर्धसैनिक भलाई बोर्ड गठित नहीं कर सकती, उस सरकार से 20 लाख पैरा मिलिट्री परिवार क्या उम्मीद करेंगे। 

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