पुरुषों से तीन गुना ज्यादा महिलाएं करती हैं आत्महत्या की कोशिश
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देश में पुरुषों की तुलना में महिलाएं करीब तीन गुना अधिक आत्महत्या का प्रयास करती हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि समाज में 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोग इस मामले में सबसे अधिक असुरक्षित हैं। अवसाद को आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बताया गया है।
भारतीय मनोरोग सोसाइटी के अनुसार महज 10 से 15 फीसदी आत्महत्या के प्रयास आवेग में आकर किए जाते हैं जबकि शेष को समय पर हस्तक्षेप करके और उपयुक्त मनो-सामाजिक चिकित्सा के जरिये रोका जा सकता है।
आज वैश्विक समुदाय आत्महत्या रोकने संबंधी जागरूकता फैलाने के लिए ‘वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे’ का अवलोकन कर रहा है। आत्महत्या दुनियाभर में मौत का बड़ा कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में हर साल आठ लाख लोगों की मौत आत्महत्या से होती है।
हर 40 सेकेंड में एक आत्महत्या
हर 40 सेकेंड पर एक आदमी आत्महत्या करता है जबकि आत्महत्या के प्रयास की दर 25 गुना अधिक है। भारतीय मनोरोग सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. जी. प्रसाद राव ने कहा कि भारत में महिलाएं पुरुषों की तुलना में औसतन 2.5 से तीन गुना अधिक आत्महत्या का प्रयास करती हैं।
लेकिन महिलाओं की तुलना में तीन गुना पुरुष अपना जीवन खत्म कर लेते हैं। राव ने कहा कि किसान, छात्र और दहेज संबंधी आत्महत्या आम है। बायो साइक्लोजिकल डिसऑर्डर और अवसाद आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण है।
इसके बाद मानसिक चिंता और पर्सनेल्टी डिसऑर्डर जैसे सीजोफ्रेनिया और बायपोलर डिसऑर्डर भी आत्महत्या के कारणों में शामिल हैं।
75 फीसदी लोग 35 साल से कम
आत्महत्या करने वाले 75 फीसदी लोग 35 साल से कम उम्र के कॉसमॉस इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंस (सीआईएमबीएस)के अध्ययन में बताया कि 71 फीसदी लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती की उन्हें क्या करना है जब उनके आसपास कोई व्यक्ति आत्महत्या की प्रवृत्ति दर्शाता है।
एक हजार क्लीनिकल रिसर्च आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार आत्महत्या करने वाले 75 फीसदी लोग 35 साल से कम उम्र के थे। सीआईएमबीएस ने दिल्ली एनसीआर में 18 से 62 साल आयु वर्ग में करीब 500 लोगों को अध्ययन में शामिल किया गया।