पीएम मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं, बोले- इस बार विजयादशमी होगी बहुत खास
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नियंत्रण रेखा के पार आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र किए बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी शक्तिशाली देश के लिए सशस्त्र सेना को सामर्थ्यवान होना जरूरी है और हमारी सेना में वह शौर्य और सामर्थ्य है। लिहाजा देशवासियों के लिए इस साल की विजयादशमी बहुत खास है।
उन्होंने कहा, ‘हम विजयादशमी मनाने की तैयारी कर रहे हैं।’ देशवासियों के लिए इस साल की विजयादशमी को बहुत खास बताते हुए उन्होंने बुराई पर अच्छाई की जीत (सर्जिकल स्ट्राइक) के लिए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उनकी यह टिप्पणी सर्जिकल स्ट्राइक के संदर्भ में ही थी।
विज्ञान भवन में दीनदयाल जन्मशती वर्ष दीनदयाल उपाध्याय संपूर्ण वाङ्मय की 15 पुस्तकों के लोकार्पण अवसर पर उन्होंने कहा कि पंडितजी का जीवनकाल लंबा नहीं था, मगर उन्होंने एक विचार को विकल्प बना दिया। उन्होंने दीनदयाल की दूरदृष्टि, उनकी जीवटता और उनकी सादगी का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि दीनदयाल की सादगी का आलम यह था कि दशकों तक सार्वजनिक जीवन में रहने के बावजूद उनके साथ ट्रेन में सफर करने वाले लोग भी उन्हें नहीं पहचान पाते थे। लोकार्पण समारोह में संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह भी उपस्थित थे।
'मैं अपनी ताकत और सेहत के लिए कसरत करता हूं'
पाकिस्तान का परोक्ष जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘प्रतिस्पर्धा के इस युग में देश को सक्षम और शक्तिशाली बनाने की जरूरत है। लेकिन किसी के विरुद्ध ताकतवर नहीं होना चाहिए। यदि हम अपनी क्षमता का अभ्यास करते हैं तो पड़ोसी को खुद को निशाना बनाए जाने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं अपनी ताकत और सेहत के लिए कसरत करता हूं।’ इस दौरान उन्होंने दीनदयाल का जिक्र करते हुए कहा कि राम मनोहर लोहिया ने भी जनसंघ के नेताओं के प्रयासों की तारीफ की थी जिनके कारण 1967 में कांग्रेस का विकल्प उभरा था। दीनदयाल के नक्शे-कदम पर चलते हुए हमारी सरकार गरीबों पर केंद्रित योजनाओं से मानवता की सेवा कर रही है।
डॉ. महेश चंद्र शर्मा द्वारा संपादित पुस्तकों के लोकार्पण के बाद पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद सालों तक कांग्रेस का कोई विकल्प नहीं था। जनसंघ के लोग चुनाव में जमानत बचने पर पार्टी दिया करते थे। ऐसे में दीनदयाल ने कांग्रेस के सामने संगठन आधारित राजनीतिक सोच दी। उन्हीं की सोच और विचार के कारण हम विपक्ष से विकल्प के रूप में देश के सामने आए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दीनदयाल का आर्थिक चिंतन गरीबों और वंचितों के पक्ष में था। आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में उनके पास दूरदृष्टि थी। उन्होंने 1961 में ही फिरोजपुर में सतलुज के किनारों पर पाकिस्तानी कब्जे और भारतीय क्षेत्र में बहने वाली इचामती नदी के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने पर चिंता जताई थी।