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यहां के एक गांव में हर घर में हैं एक शिक्षक, पूरे प्रदेश में है मांग
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 05 Sep 2016 04:18 PM IST
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कर्नाटक के बेलागवी जिले के सावादत्ती तालुक में आने वाले इंचल गांव को शिक्षकों का गांव कहा जाता है। बताया जाता है कि यहां तकरीबन हर घर में एक शिक्षक हैं, जिनकी प्रदेश में अच्छी खासी डिमांड है। इस गांव के हर अभिभावक चाहते हैं कि उनका बेटा बड़ा होकर शिक्षक बने।
जिला मुख्यालय से तकरीबन 41 किमी दूर इस गांव की आबादी छह हजार है। इसमें करीब 600 से अधिक शिक्षक हैं, जो कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में पढ़ाते हैं। वहीं, गांव में बड़े पैमाने पर युवा ट्रेनिंग प्रोग्राम कर चुके हैं और अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।
1970 में इस गांव में सिर्फ एक प्राइमरी स्कूल और 8 शिक्षक थे। इसके आगे की पढ़ाई के लिए लोगों को बैलहोंगल कस्बे में जाना पड़ता था। इससे छात्रों को बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसके बाद शिवानंद भारती स्वामी ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू किया। नतीजतन गांव में रहने वाले शब्बीर मिराजन्नावर के परिवार में 13 शिक्षक हैं। यहां हर घर में औसतन 5 शिक्षक हैं।
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जिला मुख्यालय से तकरीबन 41 किमी दूर इस गांव की आबादी छह हजार है। इसमें करीब 600 से अधिक शिक्षक हैं, जो कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में पढ़ाते हैं। वहीं, गांव में बड़े पैमाने पर युवा ट्रेनिंग प्रोग्राम कर चुके हैं और अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।
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1970 में इस गांव में सिर्फ एक प्राइमरी स्कूल और 8 शिक्षक थे। इसके आगे की पढ़ाई के लिए लोगों को बैलहोंगल कस्बे में जाना पड़ता था। इससे छात्रों को बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसके बाद शिवानंद भारती स्वामी ने बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रयास शुरू किया। नतीजतन गांव में रहने वाले शब्बीर मिराजन्नावर के परिवार में 13 शिक्षक हैं। यहां हर घर में औसतन 5 शिक्षक हैं।
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शिवानंद भारती ने किया विशेष प्रयास
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शिवानंद भारती ने कुछ दूसरे शिक्षकों के साथ मिलकर एक एजुकेशन सेंटर की स्थापना की। इन लोगों की प्रयासों की बदौलत इंचल गांव उच्च शिक्षा का केंद्र बन गया। इसके बाद 1984 में यहां रूरल टीचर्स ट्रेनिंग सेंटल खोला गया। इसमें गांव के छात्रों को मुफ्त में प्रशिक्षण मिलता है।
इसके बाद यहां प्रसाद निलयम खुला जहां छात्रों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद गांव की साक्षरता दर में सुधार हुआ। ज्यादातर छात्र टीचर ट्रेनिंग लेने लगे। आज इंचल में एक प्राइमरी स्कूल के साथ-साथ एक हाईस्कूल, एक पीयू कॉलेज, एक संस्कृत स्कूल और एक डिग्री कॉलेज खुला।
इसके बाद यहां प्रसाद निलयम खुला जहां छात्रों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद गांव की साक्षरता दर में सुधार हुआ। ज्यादातर छात्र टीचर ट्रेनिंग लेने लगे। आज इंचल में एक प्राइमरी स्कूल के साथ-साथ एक हाईस्कूल, एक पीयू कॉलेज, एक संस्कृत स्कूल और एक डिग्री कॉलेज खुला।