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गुजरात चुनाव: पीएम मोदी ने इन 10 वजहों से चुनाव में पलट दी बाजी
अमर उजाला डॉट कॉम, नई दिल्ली
Updated Mon, 18 Dec 2017 04:53 PM IST
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पीएम मोदी
- फोटो : SELF
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गुजरात चुनाव में नोटबंदी-जीएसटी की नाराजगी के बीच कांग्रेस ने विभिन्न वर्गों के युवा नेताओं हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर को लेकर जातिगत समीकरण साधने की पुरजोर कोशिश की लेकिन वह इसके बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की विशेष रणनीति के आगे कामयाब नहीं हो सकी। 1982 के बाद पहली बार गुजरात चुनाव में जातिगत का मसला जोरदार उछला। लेकिन कांग्रेस को इसका मनमाफिक फायदा नहीं मिल सका।
इस स्लाइड में जानिए आखिर पीएम मोदी ने कैसे गुजरात की बाजी अंतिम दौर में पलट करके रख दी।
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इस स्लाइड में जानिए आखिर पीएम मोदी ने कैसे गुजरात की बाजी अंतिम दौर में पलट करके रख दी।
यूपी चुनाव की तरह बनाई रणनीति
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पीएम मोदी और भाजपा ने लगातार दूसरा बड़ा चुनाव जीतने की ओर है। यूपी में भारी बहुमत के बाद गुजरात में भी भाजपा बहुमत की ओर आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी ने गुजरात में 34 रैलियां की। पीएम बनने के बाद गुजरात का चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया था। जिसे विशेष रणनीति के साथ पीएम मोदी ने आसान कर दिया।
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52 पाटीदारों को चुनाव मैदान में उतारा
भाजपा ने हार्दिक पटेल के वोट बैंक में एक तरह से सेंध कर सफलता पाई। उन्होंने पाटीदार उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा। 182 में से 52 पाटीदारों को चुनाव मैदान में उतारा। हार्दिक पटेल के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने यह चुनावी रणनीति तैयार की। इसमें उसे सफलता भी मिली। मणिशंकर अय्यर के नीच संबंधी बयान ने भी चुनाव में भाजपा के पक्ष में काम किया।
इमोशनल कार्ड को जमकर भुनाया
पीएम मोदी ने इस चुनाव में अपने इमोशनल कार्ड को जमकर भुनाया। भाजपा की ओर से जनता को बताया गया कि 13 साल तक पीएम मोदी मुख्यमंत्री रहे। अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने राज्य का जमकर विकास किया। सीएम से पीएम के पद तक पहुंचे। लिहाजा भाजपा को ही जनता को पूरा समर्थन देना चाहिए।
अमित शाह का प्रबंधन
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का प्रबंधन इस चुनाव की खास विशेषता रही। दिल्ली में रहते हुए गुजरात का चुनाव जीतना उनके लिए एक अग्निपरीक्षा रही। शाह ने बूथ मैनेजमेंट पर विशेष रणनीति के साथ कार्य किया। भाजपा के चाणक्य की पदवी पा चुके अमित शाह के विश्वास में इस जीत के बाद और मजबूती आएगी।
पीएम मोदी का मैजिक
गुजरात में नोटबंदी और जीएसटी के बाद व्यापारियों में नाराजगी की बात कही जा रही थी। लेकिन पीएम मोदी का मैजिक गुजरात में बरकरार रहा। लोगों को लगा गुजरात का संपूर्ण विकास केंद्र में सत्ताधारी भाजपा के राज में ही होगा। लिहाजा जनता ने भाजपा में पूरी तरह विश्वास जताया।
गुजराती अस्मिता को प्रतिष्ठा बनाया
पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात चुनाव को गुजराती समुदाय के लिए प्रतिष्ठा का विषय बना दिया था। वह हर रैली में गुजराती अस्मिता की बात जोर-शोर से उठाते थे। उन्होंने कहा था कि यह चुनाव गुजराती समुदाय के लिए एक तरह से सम्मान का मामला है।
भाजपा ओबीसी वर्ग को पकड़ी रही
भाजपा ने ओबीसी वर्ग को छोड़ा नहीं। हार्दिक पटेल के आरक्षण की मांग पर आंदोलन के बाद भी भाजपा पाटीदारों के साथ खड़ी नहीं रही। अगर वह पाटीदारों के साथ खड़ी रहती तो ओबीसी वर्ग भाजपा से बिछड़ जाता। पटेल ने पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करते हुए एक बड़ा आंदोलन चलाया था।
राम मंदिर को बनाया मुद्दा
राम मंदिर के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि मंदिर मुद्दे को 2019 के चुनाव तक टाल देना चाहिए। सिब्बल के इस बयान को भाजपा ने चुनाव में बेहतरीन ढंग से उठाया। उसने जनता से कहा कि कांग्रेस राम मंदिर नहीं बनने दे रही है।
कांग्रेस रही चेहरा विहीन
गुजरात में 1995 में सत्ता गंवाने के बाद अब तक कांग्रेस वहां कोई बड़ा नेता नहीं खड़ा कर पाई है। चुनाव में एक तरह से कांग्रेस बगैर चेहरे के उतरी। अहमद पटेल को राज्यसभा में जोड़-तोड़ के जरिए जरूर पहुंचा दिया गया लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह राज्य से कांग्रेस के लिए एक बड़े नेता हो सकते थे।
गुजराती में भाषण
पीएम मोदी ने गुजरात में कई रैलियों में गुजराती में भाषण दिया। राज्य की जनता को गुजराती भाषा से बहुत प्रेम है। यह पीएम मोदी बखूबी जानते थे। इसलिए ही उन्होंने रैलियों में गुजराती में भावुक भाषण दिया। क्योंकि उन्हें पता था कि गुजराती में भाषण देकर काफी वोट हासिल किए जा सकते हैं।