{"_id":"58d0f4794f1c1be7431a37d5","slug":"things-to-know-about-khushwant-singh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"खुशवंत सिंह: जिस्म तो बूढ़ा हो गया लेकिन दिल जवान रहा","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
खुशवंत सिंह: जिस्म तो बूढ़ा हो गया लेकिन दिल जवान रहा
Updated Tue, 21 Mar 2017 03:48 PM IST
विज्ञापन
खुशवंत सिंह
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खुशवंत सिंह, साहित्य और पत्रकारिता की दुनिया की ऐसा नाम जिसे कोई पहचान की जरूरत नहीं। अपनी बेबाकी और बिंदासपन के लिए मशहूर रहे लेखक, पत्रकार खुशवंत सिंह आज से तीन साल पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए। 99 साल की उम्र में उनका देहांत हुआ। जानिए उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें।
1. खुशवंत सिंह का जन्म साल 1915 में पंजाब के हदाली में हुआ था। अब पंजाब का यह हिस्सा पाकिस्तान में है।
2. 1951 में खुशवंत सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने भारत सरकार की योजना नामक पत्रिका की शुरुआत की। वे इलस्ट्रेटिड वीकली, नेशनल हेराल्ड और हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक भी रहे।
3. साल 1974 में खुशवंत सिंह को पद्म भूषण अवॉर्ड से नवाजा गया। जिसे बाद में उन्होंने लौटा दिया। खुशवंत सिंह स्वर्ण मंदिर में आर्मी के प्रवेश पर नाराज थे।
विज्ञापन
4. साल 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया। यह अवॉर्ड उन्हें साहित्य में अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया।
5. खुशवंत सिंह को सिख समाज ने भी निशान-ए-खालसा ने सम्मानित किया।
6. खुशवंत सिंह ने इंटरव्यू के दौरान (तब उनकी उम्र 85 के करीब थी) कहा था, 'तमन्ना तो बहुत रहती हैं दिल में, वो कहां ख़त्म होती हैं. जिस्म से तो बूढ़ा हूं लेकिन आंख तो अब भी बदमाश है. दिल अब भी जवान है. दिल में ख़्वाहिशें तो रहती हैं आख़िरी दम तक रहेंगी, पूरी नहीं कर पाऊंगा ये भी मुझे मालूम है।'
विज्ञापन
1. खुशवंत सिंह का जन्म साल 1915 में पंजाब के हदाली में हुआ था। अब पंजाब का यह हिस्सा पाकिस्तान में है।
2. 1951 में खुशवंत सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने भारत सरकार की योजना नामक पत्रिका की शुरुआत की। वे इलस्ट्रेटिड वीकली, नेशनल हेराल्ड और हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक भी रहे।
विज्ञापन
3. साल 1974 में खुशवंत सिंह को पद्म भूषण अवॉर्ड से नवाजा गया। जिसे बाद में उन्होंने लौटा दिया। खुशवंत सिंह स्वर्ण मंदिर में आर्मी के प्रवेश पर नाराज थे।
विज्ञापन
4. साल 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा गया। यह अवॉर्ड उन्हें साहित्य में अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया।
5. खुशवंत सिंह को सिख समाज ने भी निशान-ए-खालसा ने सम्मानित किया।
6. खुशवंत सिंह ने इंटरव्यू के दौरान (तब उनकी उम्र 85 के करीब थी) कहा था, 'तमन्ना तो बहुत रहती हैं दिल में, वो कहां ख़त्म होती हैं. जिस्म से तो बूढ़ा हूं लेकिन आंख तो अब भी बदमाश है. दिल अब भी जवान है. दिल में ख़्वाहिशें तो रहती हैं आख़िरी दम तक रहेंगी, पूरी नहीं कर पाऊंगा ये भी मुझे मालूम है।'
संता-बंता के जनक, 80 से ज्यादा बेस्ट सेलिंग किताबें लिखीं
खुशवंत सिंह और संता-बंता किरदार
7. खुशवंत सिंह ने करीब 80 से ज्यादा बेस्ट सेलिंग बुक्स लिखी हैं। इसके अलावा 40 से ज्यादा प्रकाशनों में उनके साप्ताहिक कॉलम छपे हैं।
8. अपने जीवन काल में उन्होंने 'भारत सरकार' के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के पद पर भी काम किया। खुशवंत सिंह ने कई अनमोलन रचनाएं लिखी हैं। मशहूर उपन्यास 'ट्रेन टू पाकिस्तान' उन्हीं की देन है।
9. संता-बंता के जनक खुशवंत सिंह हैं। उन्होंने ही सिखों के इस हास्य पसंद किरदार को जन्म दिया और अपनी पुस्तकों में भी इनका खूब प्रयोग किया।
10. खुशवंत सिंह का शराब के प्रति प्रेम सब जानते हैं। उन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु में शराब पीना शुरू कर दिया था और उन्हें प्रीमियम स्कॉच पसंद थी।
8. अपने जीवन काल में उन्होंने 'भारत सरकार' के विदेश मंत्रालय में विदेश सेवा के पद पर भी काम किया। खुशवंत सिंह ने कई अनमोलन रचनाएं लिखी हैं। मशहूर उपन्यास 'ट्रेन टू पाकिस्तान' उन्हीं की देन है।
9. संता-बंता के जनक खुशवंत सिंह हैं। उन्होंने ही सिखों के इस हास्य पसंद किरदार को जन्म दिया और अपनी पुस्तकों में भी इनका खूब प्रयोग किया।
10. खुशवंत सिंह का शराब के प्रति प्रेम सब जानते हैं। उन्होंने मात्र 25 वर्ष की आयु में शराब पीना शुरू कर दिया था और उन्हें प्रीमियम स्कॉच पसंद थी।
जब आत्मकथा के लिए झेला मुकदमा !
खुशवंत सिंह और उनकी लिखी किताबें
11. खुशवंत सिंह ने शराब के अलावा महिलाओं और प्रेम पर भी खुलकर विचार रखे है। उन्होंने कभी अपने बारे में कुछ भी छिपाने की कोशिश नहीं की।
12. खुशवंत सिंह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। वे 1980 से लेकर 1986 तक राज्यसभा के सदस्य थे।
13. खुशवंत सिंह ने अपनी आत्मकथा लिखी। जिसे लेकर वे विवादों से भी घिरे। आत्मकथा ने लिखे एक खास प्रकरण को लेकर मेनका गांधी ने उन पर मुकदमा तक दायर कर दिया था।
14. खुशवंत सिंह को वैसे तो तीन भाषाओं (पंजाबी, इंग्लिश और हिंदी) का ज्ञान था लेकिन उन्हें अंग्रेजी में लिखना ही ज्यादा पसंद था। इस बात का खुलासा स्वयं उनके बेटे राहुल सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान किया।
12. खुशवंत सिंह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। वे 1980 से लेकर 1986 तक राज्यसभा के सदस्य थे।
13. खुशवंत सिंह ने अपनी आत्मकथा लिखी। जिसे लेकर वे विवादों से भी घिरे। आत्मकथा ने लिखे एक खास प्रकरण को लेकर मेनका गांधी ने उन पर मुकदमा तक दायर कर दिया था।
14. खुशवंत सिंह को वैसे तो तीन भाषाओं (पंजाबी, इंग्लिश और हिंदी) का ज्ञान था लेकिन उन्हें अंग्रेजी में लिखना ही ज्यादा पसंद था। इस बात का खुलासा स्वयं उनके बेटे राहुल सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान किया।