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जानें कब कम सीटों के बावजूद यह नेता बने मुख्यमंत्री तो इन्होंने गंवाया पद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 17 May 2018 01:48 PM IST
these were the situations when Chief Ministers were unable to prove majority in Vidhan Sabha
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों में राज्य की जनता ने किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया है। 104 सीटें जीतने के बाद भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। हालांकि कांग्रेस और जेडीएस ने 117 विधायकों के समर्थन के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया था लेकिन राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता दिया। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब येदियुरप्पा के सामने सबसे बड़ा संकट सदन में विश्वासमत हासिल करने का है। यदि वह बहुमत हासिल करने में असफल रहे तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी मुख्यमंत्री को इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी कुछ दिनों के लिए सरकारें बन चुकी हैं। आज हम आपको बताते हैं ऐसी ही कुछ सरकारों के बारे में जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया।
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1. साल 2017 में हुए मणिपुर चुनाव के दौरान कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी लेकिन यहां भाजपा पहली बार अपनी सरकार बनाने में सफल रही। भाजपा ने एनपीएफ की 4, एनपीपी की 4 और लोजपा के एक सदस्य के समर्थन से सरकार बनाई और बीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने।

2. साल 2017 में कांग्रेस को 17 जबकि भाजपा को 13 सीटें मिली थी। इसके बावजूद भाजपा के मनोहर पर्रिकर यहां सरकार बनाने में कामयाब रहे। यहां राज्यरपाल मृदुला सिन्हा ने भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता दिया और उसने एमजीपी, जीपीएफ और अन्य पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाई।

3. साल 2016 में तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने झारखंड में शिबू सोरेन को सरकार बनाने का न्यौता दिया था। उन्होंने कांग्रेस के समर्थन से 10 दिन की सरकार बनाई थी क्योंकि वह सदन में विश्वासमत हासिल नहीं कर पाई थी। जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

4. साल 2013 में दिल्ली के तत्कालीन उप-राज्यपाल नजीब जंग ने बहुमत साबित ना कर पाने की स्थिति को देखते हुए भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देने से मना कर दिया था। उन्होंने राज्य की सबसे बड़ी पार्टी आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रण दिया। जिसने 28 दिसंबर 2013 को कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने। 

5. साल 1996 में उत्तर प्रदेश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सरकार केवल 39 सीटों से सरकार नहीं बना पाई। उस समय कल्याण सिंह ने 67 सीटें जीतने वाली बहुजन समाज पार्टी को अपना समर्थन दिया और 6-6 महीने के लिए सीएम की शर्त के साथ मायावती को मुख्यमंत्री बना दिया। मगर अफसोस यह गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया और 6 महीने बाद ही टूट गया।

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