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पीएम मोदी के इन तीन मंत्रों से बदलेगी पुलिस व्यवस्था, डीजी-आईजी वार्षिक सम्मेलन में खिंचा बदलाव का खाका

Thu, 03 Dec 2020 11:23 PM IST
संजीव कुमार झा जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 03 Dec 2020 11:23 PM IST
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These three mantras of PM Modi will change the police system in india
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए तीन मंत्रों के आधार पर भारतीय पुलिस व्यवस्था बदलने जा रही है। पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में नई व्यवस्था का खाका खींचा गया है। पीएम के जिन मंत्रों पर काम होगा, उनमें 'अनुसंधान' को पहले नंबर पर रखा गया है। दूसरे स्थान पर कौशल और तीसरे स्थान के लिए ट्रेनिंग को चुना गया है।

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हालांकि यह क्रम राज्यों की मौजूदा स्थिति के अनुसार बदल सकता है, क्योंकि पुलिस सिस्टम को लेकर सभी राज्य एक जैसे नहीं हैं। अपराधों पर नियंत्रण के अलावा उनकी जानकारी समय रहते मिल जाए, इसके लिए नए विकल्पों पर काम किया जाएगा। प्रौद्योगिकी और मानव संसाधनों के बीच बेहतर समन्वय कैसे बने, इस पर विशेष जोर रहेगा।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स का इस्तेमाल आपराधिक घटनाओं को रोकने और अपराधियों का पीछा करने के लिए किस तरह किया जाए, इस पर भी चिंतन किया गया है। पीएम मोदी की पुलिस संगठनों में नवाचार और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने की पहल को आगे बढ़ाने के लिए बीपीआर एंड डी को नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों के 55वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित किया था। यह सम्मेलन पहली बार वर्चुअल तरीके से आयोजित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले सम्मेलन के सभी कार्य बिंदुओं की समीक्षा की है।

सम्मेलन में भाग रहे एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार आधुनिक पुलिस की अवधारणा को तेजी से आगे बढ़ाएगी। इसके लिए प्रभावी और संवेदनशील सुरक्षा के प्रबंधन पर काम होगा। ऐसी सुरक्षा का मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के बीच पुलिस के प्रति एक विश्वास जागृत हो। ऐसी व्यवस्था में लोग खुद पुलिस की मदद के लिए आगे आएंगे।

देखने में आया है कि बहुत से अपराधों को सामान्य तरीके से अंजाम दिया जाता है, लेकिन पुलिस के पास समय रहते जानकारी नहीं पहुंच पाती। अगर लोगों को अपने पुलिसिंग सिस्टम पर भरोसा होता है तो वे तुरंत सक्रिय होकर पुलिस की मदद कर सकते हैं। इस दिशा में अब खास काम होगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने इस सम्मेलन में नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया था। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। सभी पुलिस संगठनों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच आसूचना यानी इंटेलिजेंस को लेकर तालमेल बहुत जरुरी है।


इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों को एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाना होगा। इससे पहले के सम्मेलन में पीएम द्वारा जो सुझाव दिए गए थे, उन पर कितना काम हुआ है, उसे लेकर आईबी ने एक प्रस्तुतीकरण दिया है। देश में आतंकी और वामपंथी उग्रवाद के मोर्चे पर विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मिलकर काम किया है। इसका सार्थक नतीजा भी देखने को मिल रहा है।

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