सीबीआई बनाम सीबीआई के झगड़े की वजह हैं ये अधिकारी
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सीबीआई बनाम सीबीआई की लड़ाई अब खुलकर सबके सामने आ गई है। सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक (डायरेक्टर) राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उनपर एक कारोबारी सतीष बाबू सना से रिश्वत लेने का आरोप है। यह मामला मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़ा हुआ है।
वहीं, अस्थाना ने पलटवार करते हुए सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा पर ही रिश्वत लेने का आरोप लगा दिया है। उन्होंने आलोक वर्मा के खिलाफ रिश्वत लेने से संबंधित शिकायत कैबिनेट सचिव को भेज दिया है। बता दें कि सीबीआई के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब दो शीर्ष अधिकारी ही एक-दूसरे के खिलाफ रिश्वत लेने का आरोप लगा रहे हैं।
इस मामले में एजेंसी ने डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया है। डीएसपी देवेंद्र कुमार को राकेश अस्थाना का चहेता अधिकारी माना जाता है। सीबीआई ने उनके घर पर छापा मारकर 8 मोबाइल फोन और 1 आईपैड जब्त किया है। साथ ही मोइन कुरैशी मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
राकेश अस्थाना पर क्या हैं आरोप
अस्थाना पर आरोप है कि मीट निर्यातक मोइन कुरैशी की संलिप्तता वाले एक मामले की जांच में एक कारोबारी को राहत देने के लिए उन्होंने कथित तौर पर घूस ली थी। राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर में हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना ने दावा किया है कि उसने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को पिछले साल 3 करोड़ रुपये दिए थे। सीबीआई ने सतीश सना की शिकायत के आधार पर अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अस्थाना ने आलोक वर्मा पर क्या आरोप लगाया है?
दरअसल, दो महीने पहले राकेश अस्थाना ने कैबिनेट सचिव से सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ रिश्वत लेने की शिकायत की थी। उन्होंने आलोक वर्मा के खिलाफ आरोप लगाया था कि उन्होंने सतीश सना को मोइन कुरैशी मामले से निकलवाने के लिए 2 करोड़ रुपये लिए हैं।
ये हैं सीबीआई के अंदरूनी कलह से जुड़े मुख्य लोग
आलोक वर्मा
आलोक वर्मा 1979 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के एक आईपीएस अधिकारी हैं। वह 1 फरवरी, 2017 से सीबीआई के निदेशक के पद पर हैं। वह सीबीआई के निदेशक बनने से पहले दिल्ली के पुलिस कमिश्नर थे। उससे पहले वो तिहाड़ जेल के महानिदेशक थे। वह दिल्ली पुलिस, अंडमान निकोबार, पुडुचेरी, मिजोरम और आईबी में कई पदों पर काम कर चुके हैं। हालांकि सीबीआई निदेशक बनने से पहले सीबीआई में काम करने का उनका कोई अनुभव नहीं था।
राकेश अस्थाना
राकेश अस्थाना 1984 बैच के गुजरात के आईपीएस अधिकारी हैं और फिलहाल सीबीआई में विशेष निदेशक का पद संभाल रहे हैं। वह चारा घोटाला और गोधरा ट्रेन कांड की जांच कर चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का चहेता अधिकारी बताया था। उन्हें पिछले साल ही सीबीआई का विशेष निदेशक नियुक्त किया गया था।
एके शर्मा
एके शर्मा 1987 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें 2015 में सीबीआई का विशेष निदेशक नियुक्त किया गया था। इसी साल उन्हें पदोन्नति देकर सीबीआई का अतिरिक्त निदेशक बनाया गया है और राकेश अस्थाना जिन मामलों की जांच कर रहे थे, वो सारे मामले अब उनसे लेकर एके शर्मा को सौंप दिए गए हैं। वह अब लगभग सभी मामलों में सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को सलाह देते हैं।
देवेंद्र कुमार
देवेंद्र कुमार सीबीआई में डीएसपी के पद पर हैं। उन्हें सोमवार को ही राकेश अस्थाना रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने उनपर आरोप लगाया है कि उन्होंने राकेश अस्थाना द्वारा आलोक कुमार पर लगाए गए आरोप को सही साबित करने के लिए फर्जी स्टेटमेंट लिया था।
सीबीआई के मुताबिक, सतीश सना 26 अक्तूबर को दिल्ली में नहीं था, वो हैदराबाद में था, जबकि देवेंद्र ने 26 तारीख को उसका फर्जी स्टेटमेंट रिकॉर्ड कर दिया। ये स्टेटमेंट 161 का है, जो सवाल-जवाब के रूप में है। सवाल नंबर 5 में पूछा गया था कि तुमने किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया, तुमने ये कैसे सोच लिया कि तुम्हारी जांच प्रकिया पूरी हो गयी है। उसका जवाब था कि वो राज्यसभा के सदस्य से मिला था, जिन्होंने बोला था कि उनकी सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से बात हो गयी है, अब तुम्हें पूछताछ के लिए नोटिस नहीं आएगा।
मोइन कुरैशी
दून स्कूल और सेंट स्टीफन कॉलेज से पढ़े मोइन कुरैशी ने सबसे पहले 1993 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक बूचड़खाना खोला था और उसके बाद वो धीरे-धीरे देश का सबसे बड़ा मीट व्यापारी बन गया। कुरैशी को 2017 में दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया था। उस समय वह दुबई भागने की फिराक में था। उसपर टैक्स चोरी और हवाला के जरिए काले धन को सफेद बनाने संबंधी आरोप लगे हैं। उसे सीबीआई के पूर्व निदेशक एपी सिंह और रंजीत सिन्हा का करीबी भी माना जाता है।
सतीष बाबू सना
सतीष बाबू सना हैदराबाद का एक बड़ा कारोबारी है। कुछ साल पहले वो आंध्र प्रदेश के बिजली विभाग में एक कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था, लेकिन बाद में उसने नौकरी छोड़ दी और खुद का बिजनेस शुरू किया और कई कंपनियों का मालिक बन बैठा। उसके कई बड़े नेताओं से संबंध हैं। सबसे पहले उसका नाम तब सामने आया था, जब ई्डी मोइन कुरैशी मामले की जांच कर रही थी।
मनोज और सोमेश प्रसाद
मनोज दुबई का एक बिचौलिया है, जिसे सीबीआई ने हिरासत में लिया है। वह अपने आप को एक बैंकर बताता है और अपने भाई सोमेश के साथ कारोबार संभालता है। सना ने आरोप लगाया है कि मनोज ने उससे 5 करोड़ रुपये की डिमांड की थी, ताकि उसका नाम केस से हटाया जा सके। उसका आरोप है कि ये पैसे राकेश अस्थाना को देने के लिए मांगे गए थे।