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Tahawwur Rana: 'तहव्वुर' की सुरक्षा पर नहीं होगा भारी खर्च, 'कसाब' की सिक्योरिटी पर खर्च हुए थे 34 करोड़

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 10 Apr 2025 06:29 PM IST
सार

मुंबई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर राणा अमेरिका से भारत प्रत्यर्पण किया गया। जानकारी के मुताबिक उसे तिहाड़ जेल में रखा जाएगा। लेकिन उस पर आतंकी कसाब जितना खर्च नहीं किया जाएगा। बता दें कि, आतंकी कसाब की सुरक्षा में आईटीबीपी के लगभग दो सौ कमांडों लगे थे।

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There will not be huge expenditure on Tahawwur Rana's security, 34 crores were spent on Kasab's security
तहव्वुर राणा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम, 26/11 मुंबई हमलों की साजिश रचने के आरोपी 'तहव्वुर राणा' को अमेरिका से भारत ला रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा के भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने वाली अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके बाद तहव्वुर राणा की कस्टडी लेने के लिए रविवार को एनआईए की टीम अमेरिका पहुंची थी। 

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तहव्वुर राणा के लिए तिहाड़ में विशेष सेल
फिलहाल राणा को एनआईए की हिरासत में रखा जाएगा। हालांकि तिहाड़ जेल प्रशासन ने 'राणा' को विशेष सेल में रखने की तैयारी पूरी कर ली है। सूत्रों का कहना है कि जिस तरह से मुंबई हमले के आतंकी अजमल कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया था और उसकी सुरक्षा पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, वैसा राणा के मामले में नहीं होगा। तिहाड़ जेल में खूंखार कैदियों को रखने के लिए विशेष सेल मौजूद है। 
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2008 के मुंबई हमलों का मुख्य साजिशकर्ता
बता दें कि, मुंबई हमले में सुरक्षा कर्मियों सहित 166 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 300 लोग घायल हो गए थे। पाकिस्तान के आतंकी संगठन, 'लश्कर-ए-तैयबा' के जासूस डेविड कोलमैन हेडली और तहव्वुर राणा, जो 2008 के मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं, उन्होंने मुंबई में अलग-अलग स्थानों पर हमले का प्लान तैयार किया था। प्रमुख जगहों में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ओबरॉय ट्राइडेंट, ताज होटल और नरीमन हाउस शामिल हैं।


कसाब पर खर्च किया गया था 34 करोड़ रुपये
मुंबई हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों में से केवल अजमल कसाब को ही जिंदा पकड़ा जा सका था। अजमल कसाब को 21 नवंबर, 2012 को पुणे के यरवडा जेल में सुबह साढ़े सात बजे फांसी दे दी गई। मुंबई की आर्थर रोड जेल में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब की सुरक्षा पर आईटीबीपी के 34 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, इस राशि का भुगतान होने में कई साल लग गए थे। लम्बे समय तक महाराष्ट्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय यही तय नहीं कर पाए कि इस राशि का भुगतान कौन करेगा।

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कुछ अफसरों का यह भी मानना था कि कसाब की सुरक्षा पर खर्च हुए करोड़ों रुपये प्रत्यक्ष तौर से व्यर्थ चले गए। कसाब के मामले की सुनवाई के लिए जेल में जो खास सुरंग बनाई गई थी, उसे बमरोधी बनाने के लिए भी आईटीबीपी ने ही प्लान तैयार किया था। भारत-चीन सीमा या नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में आईटीबीपी के जवान लगते तो उनका सार्थक नतीजा भी सामने आता। इतना ही नहीं, कसाब की सुरक्षा पर खर्च हुई राशि से उस वक्त 22 हजार से ज्यादा एके-47 या फिर एक्स-95 जैसे अत्याधुनिक हथियार खरीदे जा सकते थे।

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