लॉकडाउन के दौरान कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक, गरीब मजदूरों की मदद के लिए बनाए गए 20 कंट्रोल रूम्स
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कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में 21 दिनों का लॉकडाउन किया था। अब इस महामारी के खिलाफ लड़ाई का दूसरा अध्याय शुरू हो गया है। भारत सरकार की तरफ से अब 3 मई तक के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। ऐसे में गरीब मजदूरों की मदद के लिए सरकार की तरफ से कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
दरअसल लॉकडाउन के दौरान कई कामगारों की तरफ से यह शिकायत मिल रही थी कि उन्हें या तो वेतन नहीं मिल रहा है या कम वेतन मिल रहा है। श्रमिकों का कहना था कि कई कंपनियां लॉकडाउन के नाम पर फायदा उठा रही हैं। ऐसे में अब सरकार की तरफ से इसे रोकने के लिए 20 कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
वेतन को लेकर मजदूर के साथ किसी भी तरह की नाइंसाफी न हो इसके लिए केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने वेतन से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए 20 कंट्रोल रूम बनाए हैं।
लॉकडाउन के दौरान ये 20 कंट्रोल रूम देश के अलग-अलग राज्यों के सरकार के साथ मिलकर प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का समाधान भी करेंगे। इसको लेकर श्रम मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को एक बयान में कहा गया, 'इन कॉल सेंटर्स से फोन नंबर, व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए मजदूर संपर्क कर सकते हैं।'
इन कंट्रोल रूम्स के संचालन में कौन होंगे शामिल
- लेबर इन्फोर्समेंट ऑफिसर्स
- असिस्टेंट
- लेबर कमिश्नर
- रीजनल लेबर कमिश्नर
- डेप्युटी लेबर कमिश्नर्स
जानकारी के लिए बता दें कि इन 20 कॉल सेंटर्स के काम की रोजाना निगरानी होगी। इनके कामकाज पर चीफ लेबर कमिश्नर खुद नजर रखेंगे।
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने ट्वीट कर लिखा, "प्रधानमन्त्री जी ने श्रमिक भाई बहनों के लिए और अधिक संवेदनशील होने का अनुरोध किया है इसी अनुक्रम में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा कामगारों की वेतन संबंधी समस्याओं के त्वरित निदान हेतु Workers Helpline की शुरुआत की गयी है।"