सीबीआई के नए निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला को इन चुनौतियों से पार पाना होगा
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सीबीआई के नए निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी की खोई हुई साख को दोबारा से कायम करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। वह ऐसे समय में पदभार संभालेंगे, जब देश की सभी राजनीतिक पार्टियां सीबीआई को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। इसके अलावा सीबीआई के अंदर अधिकारियों और कर्मियों में उपजे भय एवं विश्वसनीयता को बनाना शुक्ला के लिए एक बड़ा टॉस्क रहेगा। नए निदेशक के लिए जांच एजेंसी में चल रही खेमेबाजी को खत्म करना भी आसान नहीं होगा। बता दें कि सीबीआई चीफ का चयन करने के लिए सेलेक्ट कमेटी की बैठक दो बार हो चुकी थी।
कमेटी के सदस्य एवं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जन खड़गे ने पहली बैठक के बाद कहा था कि कमेटी के सामने 70-80 अधिकारियों के नामों वाली फाइल रख दी गईं। इसमें यह अलग अलग नहीं लिखा था कि किस अधिकारी को कहां पर और किस साल में कौन सी पोस्टिंग मिली है। उसमें यह भी नहीं था कि सीबीआई में काम करने वाले अधिकारी कौन-कौन से हैं। इसके बाद शुक्रवार को दोबारा से सेलेक्ट कमेटी की बैठक हुई। इस बार कमेटी के सामने काफी हद तक अधिकारियों के नाम की छंटनी की गई थी।
करीब दर्जनभर नामों पर विचार करने के बाद मध्यप्रदेश कॉडर के 1983 बैच के आईपीएस ऋषि कुमार शुक्ला के नाम पर मुहर लगा दी गई। नए निदेशक के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीबीआई में चल रहे पुराने हाई प्रोफाइल मामलों की निष्पक्ष जांच को उसके अंजाम तक पहुंचाना होगा। इनमें अगस्ता वैस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला, टूजी स्कैम, कोल स्कैम, एयर इंडिया स्केंडल और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव एवं हाल ही में दर्ज आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर का मामला प्रमुख है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के खिलाफ चिटफंड मामले की जांच और यूपी की पूर्व सीएम एवं बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ चल रहे कथित मामले को आगे बढ़ाना भी नए निदेशक की चुनौतियों में शुमार होगा। साथ ही सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ दर्ज मामले की जाँच भी शुक्ला के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।