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कुछ तो कहती है दलित एजेंडे पर भाजपा की हलचल?

Thu, 29 Mar 2018 08:57 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Mar 2018 08:57 PM IST
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There is Something behind the stir in BJP on the Dalit agenda
BR Ambedkar
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जन्मदिन आ रहा है। 14 अप्रैल को केन्द्र सरकार से लेकर तमाम राज्य सरकारें इसे जोरदार ढंग से मनाने की तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा दो और बड़े पैरोकार हैं। एक बाबा साहब के पोते प्रकाश अंबेडकर जो उनके नाम पर अपना वजूद तलाश रहे हैं और दूसरी बसपा प्रमुख मायावती जो बाबा साहब और कांशीराम के मिशन की राजनीति कर रही है। तीसरा एजेंडा संघ और भाजपा का है। भाजपा का यह दलित एजेंडा खुद मायावती की पार्टी बसपा को भी बेचैन कर रहा है। दलित एजेंडे पर संघ के साथ मिलकर काम करने वाले संघप्रिय राहुल भंते तमाम हलचल के बाद भी खामोश हैं।
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अपनी ही सरकार के खिलाफ भाजपा सांसद

भाजपा की बहराइच से सांसद सावित्री बाई फूले अपनी ही पार्टी के एजेंडे के खिलाफ धरना देने जा रही हैं। सावित्री बाई फूले का धरना हाल में अनुसूचित जाति और जनजाति को लेकर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर है। सावित्री बाई फूले ने अमर उजाला को बताया कि मौजूदा संविधान के प्रावधान दलितों को आरक्षण का अधिकार देते हैं।
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कुछ लोग बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के इस संविधान और आरक्षण के खिलाफ हैं। वह इसे खत्म कर देने की साजिश कर रहे हैं। जिस दिन यह संविधान कमजोर होगा, उसी दिन दलितों को मिलने वाला आरक्षण और सहूलियतें भी खत्म हो जाएंगी। इसलिए वह संविधान और आरक्षण को अक्षुण बनाए रखने के लिए एक अप्रैल को लखनऊ में प्रदर्शन करेंगी।
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वह आरक्षण को पूरी तरह से लागू करने, शिक्षा, नौकरी हर जगह आरक्षण का कोटा भरने की मांग उठाएंगी। सावित्री बाई फूले कहती हैं कि वह इसकी कई बार लोकसभा में भी मांग उठा चुकी हैं। 

केन्द्र सरकार की पहल

There is Something behind the stir in BJP on the Dalit agenda
yogi adityanath - फोटो : amar ujala
योगी आदित्यनाथ की भी पहल
 
सावित्री बाई फूले ही नहीं उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सक्रिय हैं। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के बाद बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम के बीच में उनके पिता के नाम रामजी को लगाया जाएगा। वह भीवराव रामजी अंबेडकर लिखे जाएंगे। उ.प्र. के राज्यपाल रामनाईक भी यही चाहते हैं। राज्यपाल राम नाइक ने ही ऐसा किए जाने का सुझाव दिया था और मुख्यमंत्री ने इसे अमल में ले लिया है।

तर्क है कि महाराष्ट्र में जहां के आंबेडकर थे, वहां बेटे के नाम के साथ पिता (रामजी मालोजी सकलपाल) का नाम जोड़कर लगाया जाना चाहिए। इसको लेकर भी राजनीति शुरू हो गई है। इस पर भाजपा के ही दिल्ली से सांसद उदित राज ने भी मोर्चा खोल दिया है। उदित राज को यह नाम मंजूर नहीं है। रामजी शब्द आखिर क्यों आंबेडकर के आगे लगे? उदित राज को इसमें विवाद दिखाई पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस के एक बड़े नेता का कहना है कि भाजपा जानबूझकर इसे प्रचारित करने का प्रपंच रच रही है। 

केन्द्र सरकार की पहल

केन्द्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत के नेतृत्व में भाजपा के दलित सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक अपनी बात पहुंचाई है। यह चिंता उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल में दिए गए निर्णय को लेकर आई है। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने इसे गंभीरता से सुना है और केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में इस निर्णय को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।

विपक्षी दल भी अदालत के इस निर्णय से चिंतित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति से भेंट करके उन्हें पार्टी की चिंता से अवगत कराया है। अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस पर अपना विरोध दर्ज कराया है। 

क्यों है भाजपा में इतनी हलचल?

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बीजेपी
राहुल भंते पहले से हैं सक्रिय

संघप्रिय राहुल काफी पहले से सक्रिय हैं। वह दलितों में चेतना फैलाने के साथ-साथ उन्हें संघ की विचारधारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। संघप्रिय राहुल भंते के इस प्रयास को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का समर्थन हासिल है। सत्य नारायन जटिया भी उनके प्रयास के साथ जुड़े हैं। कुल मिलाकर भाजपा और संघ के भीतर दलित चेतना को लेकर लगातार एक हलचल चल रही है।

इस बारे में कांग्रेस पार्टी की अनुसूचित जाति विभाग से जुड़े सूत्र का कहना है कि भाजपा और संघ कभी दलितों का भला नहीं कर सकते। उनका मकसद केवल सत्ता के लिए समाज में आपसी टकराव बढ़ाना है। ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो सके। उ.प्र. में बाबा साहब भीमराव रामजी आंबेडकर के सवाल पर सूत्र का कहना है कि बेटे के नाम में पिता का नाम जोड़ देना यदि परंपरा है तो इसमें बुरा क्या है। लेकिन नाम में रामजी वही (भाजपा) जोड़ रहे हैं और वही (भाजपा) इसे विवाद का रूप भी देना चाह रहे हैं। आखिर किस स्तर की राजनीति है।

क्यों है भाजपा में इतनी हलचल?

अभी इस मुद्दे पर दूसरे दल के नेता बोलने से बच रहे हैं। इसका एक कारण दलित एजेंडे पर भाजपा को ज्यादा भाव न देने की भी राजनीति है। वहीं, माना जा रहा है कि फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनाव नतीजे से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को परेशान कर दिया है। अशोक भारती अंबेडकर दलितों में उनके अधिकार की चेतना पैदा कर रहे हैं। वह जन सम्मान पार्टी का गठन करके म.प्र. में लगातार सक्रिय हैं। उ.प्र. में भी उनका संगठन खड़ा हो रहा है।

अशोक भारती को भी इस पूरी कवायद में भाजपा के भीतर का डर, बांटने की राजनीति और 2019 के चुनाव का फोबिया दिखाई दे रहा है। हालांकि अशोक भारती का मानना है कि इतना सबकुछ करने के बाद भी भाजपा को कुछ हासिल होने वाला नहीं है। दलितों में अब काफी जागरुकता आ गई है और उन्हें आसानी से बेवकूफ बनाना संभव नहीं है।
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