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India-Australia Ties: 'अलगाववाद का कोई भविष्य नहीं', खालिस्तान चरमपंथ पर बोले पूर्व ऑस्ट्रेलियाई PM टोनी एबॉट

Tue, 18 Mar 2025 03:34 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 18 Mar 2025 03:34 PM IST
सार

India-Australia Ties: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने मंगलवार को कहा कि 'भारत के किसी भी अलगाववाद का कोई भविष्य नहीं है' और इस बात पर जोर दिया कि जो लोग यथास्थिति से नाखुश हो सकते हैं, उन्हें भारत के खिलाफ विभाजनकारी और राजनीतिक रूप से हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के बजाय सिस्टम के भीतर काम करना चाहिए।

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There is no future for any separatism: Former Australian PM Tony Abbott on Khalistan extremism, News in hindi
टोनी एबॉट, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने खलिस्तान चरमपंथियों को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने मंगलवार को कहा कि भारत के खिलाफ किसी भी तरह के अलगाववाद का कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग वर्तमान स्थिति से नाखुश हैं, उन्हें सिस्टम के अंदर रहकर काम करना चाहिए, न कि विभाजनकारी और हिंसक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए।
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खालिस्तानी उग्रवाद पर पूर्व पीएम का बयान
ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी उग्रवाद और भारत विरोधी गतिविधियों पर बोलते हुए टोनी एबॉट ने कहा, 'लोग व्यवस्था से नाखुश हैं, उन्हें उसमें सुधार के लिए काम करना चाहिए, न कि विभाजन और हिंसा जैसी गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। भारत एक आधुनिक, लोकतांत्रिक और बहु-सांस्कृतिक देश है।'
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भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मजबूत करने की वकालत
टोनी एबॉट ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रिश्तों को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों को एकजुट रहना चाहिए और कानून के शासन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि 'जब तक चीन एक कम्युनिस्ट तानाशाही बना रहेगा, तब तक उसके और उसके पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ता रहेगा। ऐसे में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लोकतांत्रिक देशों को एकजुट होकर किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून के शासन और शांति के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।'

भारत 'क्वाड' का मुख्य केंद्र- टोनी एबॉट
टोनी एबॉट ने भारत को क्वाड का दिल बताया और कहा कि अगर पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न होते, तो क्वाड जैसी साझेदारी संभव नहीं होती। उन्होंने क्वाड को नाटो के बाद सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक विकास बताया। 'क्वाड किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, कानून के शासन और छोटे देशों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। खासतौर पर तब, जब चीन आक्रामक रुख अपनाकर अपने पड़ोसियों को धमका रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर क्वाड के सदस्य देश इसे उतनी ही गंभीरता से लें, जितनी 'फाइव आईज' सुरक्षा साझेदारी को दी गई है, तो यह आने वाले दशकों में शांति और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत बन सकता है।


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रायसीना डायलॉग में भागीदारी
टोनी एबॉट ने नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग में भी भाग लिया। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड के भाषणों को सुना। उन्होंने रायसीना डायलॉग को भारत की 'मुलायम शक्ति' का बेहतरीन उदाहरण बताया और कहा कि यह दुनिया भर के विचारकों और नेताओं को एक मंच पर लाने का शानदार मौका है।  

रूस-यूक्रेन युद्ध पर टिप्पणी
रूस-यूक्रेन युद्ध पर टोनी एबॉट ने रूस को आक्रांता बताया और कहा कि यह युद्ध रूस का साम्राज्यवादी हमला है। वहीं भारत की भूमिका पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा,'भारत के रूस के साथ अच्छे संबंध रहे हैं और मैं समझ सकता हूं कि वह इसे खराब नहीं करना चाहता। लेकिन स्पष्ट रूप से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है और यह एक क्रूर युद्ध है।' उन्होंने कहा कि युद्ध जल्द खत्म होना चाहिए, लेकिन यह न्यायपूर्ण आधार पर खत्म हो। अगर यूक्रेन को किसी तरह का क्षेत्रीय समझौता करना भी पड़े, तो उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि रूस दोबारा हमला न कर सके।

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