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अवैध झंडे लगाने का मामला: हाई कोर्ट की केरल सरकार को नसीहत, कानून के अलग-अलग पैमाने नहीं हो सकते 

Mon, 21 Feb 2022 06:07 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: Amit Mandal Updated Mon, 21 Feb 2022 06:07 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि यह चिंताजनक है कि राज्य सरकार यह आश्वासन भी नहीं दे पा रही है कि भविष्य में कोई नया अवैध झंडा नहीं लगाया जाएगा।

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There can't be one law for powerful, another for ordinary people: HC to Kerala govt
केरल हाईकोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कानून के दो पैमाने नहीं हो सकते हैं, एक शक्तिशाली और एक आम नागरिकों के लिए। अदालत ने यह टिप्पणी इसे देखते हुए की कि वामपंथी सरकार राजनीतिक दलों द्वारा अनुमति के बिना फ्लैग मास्ट को रोकने में असमर्थ रही है, अदालत के आदेश के बावजूद ऐसा हुआ। हाई कोर्ट ने कहा, यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि बिना अनुमति के स्थापित किया गया झंडे का खंभा अवैध है और इसे केवल शक्तिशाली लोगों या राजनीतिक दलों द्वारा अंजाम दिया जाता है। आप किसी आम नागरिक को ऐसा नहीं करने देंगे। दो कानून नहीं हो सकते हैं, एक शक्तिशाली के लिए और दूसरा सामान्य लोगों के लिए। 

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अवैध झंडे लगाने का मामला
अदालत ने कहा कि यह चिंताजनक है कि राज्य सरकार यह आश्वासन भी नहीं दे पा रही है कि भविष्य में कोई नया अवैध झंडे का खंभा नहीं लगाया जाएगा। हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई एक पहल का समर्थन करने के बजाय राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही है। अदालत ने आगे कहा कि राज्य ने पहले झंडे के खंभे लगाने को नियंत्रण करने के लिए एक नीति लाने के लिए तीन महीने का समय मांगा था, और अब वह इसके लिए और भी समय मांग रहा है। अदालत ने कहा कि जब कार्यपालिका न्यायपालिका से समय मांगती है, तो उसमें एक ईमानदारी जुड़ी होनी चाहिए, न कि सिर्फ इसलिए कि आप समय मांगना चाहते हैं।  
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राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक एम चेरियन और वरिष्ठ सरकारी वकील एस कन्नन ने कहा कि हालांकि सरकारी तंत्र को ध्वज के खंभे पर नियंत्रण रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि बिना अनुमति के कोई नया खंभा न लगे, सभी पक्षों को एक साथ लाने के लिए और समय चाहिए। इस पर 28 मार्च तक का समय देते हुए अदालत ने दोहराया कि जब सरकार और समय मांगती है, तो इसमें ईमानदारी होनी चाहिए। अदालत एक सहकारी समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक विशेष राजनीतिक दल अवैध रूप से अपनी जमीन पर झंडे और बैनर लगा रहा है।
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