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रिपोर्ट: डायबिटीज के दुनियाभर में 82.8 करोड़ मरीज जिसमें एक चौथाई भारतीय; 1990 की तुलना में चार गुना ज्यादा
Fri, 15 Nov 2024 05:24 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 15 Nov 2024 05:24 AM IST
सार
दुनियाभर में डायबिटीज से शिकार लोगों को लेकर लैंसेट की रिपोर्ट में कई सारे दावे किए गए है। जिसमें दावा किया गया है कि दुनियाभर में 82.8 करोड़ लोगों को अपना शिकार बनाया जिसमें लगभग 21.2 करोड़ लोग भारतीय है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
डायबिटीज ने 2022 में दुनियाभर में 82.8 करोड़ लोगों को अपना शिकार बनाया। इसमें एक चौथाई भारतीय हैं। विश्व मधुमेह दिवस पर जारी लैंसेट की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2022 में भारत में करीब 21.2 करोड़ लोग इससे पीड़ित थे। एनसीडी-आरआईएससी के मुताबिक, साल 1990 के आंकड़ों की तुलना में डायबिटीज के मरीजों की संख्या चार गुना अधिक बढ़ी है। इसमें कम उम्र के लोगों के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़त हुई है।
युवाओं की बढ़ती संख्या
दुनियाभर में 30 और उससे अधिक उम्र के 44.5 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो डायबिटीज से ग्रसित होने के बाद उचित उपचार नहीं करवा पा रहे हैं। अध्ययन के अनुसार 2022 में दुनियाभर में 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लगभग 82.8 करोड़ लोग टाइप1 और टाइप2 डायबिटीज से पीड़ित थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहले अनुमान लगाया था कि लगभग 42.2 करोड़ लोगों को पुरानी बीनारी के कारण इलाज न मिलने के कारण इसके आंकड़े बढ़े हैं।
अध्यान में हुआ खुलासा
अध्ययन में कहा गया है कि 1990 के बाद से डायबिटीज की वैश्विक दर लगभग 7 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी हो गई है। इसमें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डायबिटीज के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।
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भारत के डाटा पर उठे सवाल...
लैंसेट की रिपोर्ट में भारत में 21 करोड़ से अधिक मधुमेह रोगी होने के दावे पर विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। दरअसल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हालिया अध्ययन के अनुसार भारत में 2023 में 10.1 करोड़ मधुमेह रोगी ही हैं। आईसीएमआर के आंकड़ों के अनुसार प्री डायबिटीक लोगों की संख्या 13 करोड़ से अधिक है।
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युवाओं की बढ़ती संख्या
दुनियाभर में 30 और उससे अधिक उम्र के 44.5 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो डायबिटीज से ग्रसित होने के बाद उचित उपचार नहीं करवा पा रहे हैं। अध्ययन के अनुसार 2022 में दुनियाभर में 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लगभग 82.8 करोड़ लोग टाइप1 और टाइप2 डायबिटीज से पीड़ित थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहले अनुमान लगाया था कि लगभग 42.2 करोड़ लोगों को पुरानी बीनारी के कारण इलाज न मिलने के कारण इसके आंकड़े बढ़े हैं।
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अध्यान में हुआ खुलासा
अध्ययन में कहा गया है कि 1990 के बाद से डायबिटीज की वैश्विक दर लगभग 7 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी हो गई है। इसमें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में डायबिटीज के मामलों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।
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भारत के डाटा पर उठे सवाल...
लैंसेट की रिपोर्ट में भारत में 21 करोड़ से अधिक मधुमेह रोगी होने के दावे पर विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। दरअसल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हालिया अध्ययन के अनुसार भारत में 2023 में 10.1 करोड़ मधुमेह रोगी ही हैं। आईसीएमआर के आंकड़ों के अनुसार प्री डायबिटीक लोगों की संख्या 13 करोड़ से अधिक है।