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अध्ययन: करोड़ों साल पहले धरती की करवट ने रचा जीवन का अध्याय, एशिया-अफ्रीका पुल ने शुरू किया जीवन का नया दौर
Tue, 03 Jun 2025 07:05 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 03 Jun 2025 07:05 AM IST
सार
करीब दो करोड़ साल पहले धरती की भूगर्भीय हलचलों ने एशिया और अफ्रीका को जोड़ने वाला जमीनी पुल बनाया। इस पुल ने हाथी, जिराफ, गैंडे, इंसानों के पूर्वजों जैसे जीवों के एक महाद्वीप से दूसरे में प्रवास का रास्ता खोला। यह बदलाव जीवन के विकास की दिशा तय करने वाला साबित हुआ।
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धरती की करवट ने रचा जीवन का अध्याय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धरती के गर्भ में करोड़ों साल पहले हुई हलचलें आज के हाथी, जिराफ और इंसान जैसे जीवों के अस्तित्व और स्थानांतरण की बुनियाद बनीं। वैज्ञानिकों के अनुसार अरब प्रायद्वीप और एशिया-अफ्रीका के बीच बना एक विशाल जमीनी पुल न केवल इन महाद्वीपों को जोड़ने वाला सेतु था बल्कि यह जीवन के विकास और विस्तार की दिशा भी तय करने वाला प्रमुख कारण बना।
एक भूगर्भीय प्रक्रिया ने करीब दो करोड़ साल पहले एशिया और अफ्रीका को एक जमीनी पुल के माध्यम से जोड़ दिया, जिसने न केवल भूगोल बदला बल्कि जीवन की दिशा भी बदल दी। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह शोध कार्य किया है जो नेचर रिव्यूज अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ है। इसके अनुसार अरब प्रायद्वीप और आज का अनातोलिया (वर्तमान तुर्की का हिस्सा) कभी एक विशाल भूभाग के रूप में अस्तित्व में आए, जिसने दो महाद्वीपों के बीच की दूरी मिटा दी।
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कैसे पुल बना महाद्वीप पर आगमन का रास्ता
बता दें कि यह पुल हाथी, जिराफ, गैंडे, चीते और मनुष्य के पूर्वजों को एक महाद्वीप से दूसरे में जाने का रास्ता देने वाला मार्ग बना। अफ्रीका करीब साढ़े सात करोड़ साल तक अलग-थलग रहा : इससे पहले अफ्रीका करीब साढ़े सात करोड़ साल तक अन्य महाद्वीपों से अलग-थलग रहा। परंतु जैसे ही अरब प्रायद्वीप ऊपर उठा और टेथिस सागर की गहराइयों में परिवर्तन हुआ, अफ्रीका और एशिया एक भूभाग से जुड़ गए। यह भूगर्भीय घटना टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर और मेंटल से उठने वाली गर्म चट्टानों की वजह से संभव हो पाई।
यह प्रक्रिया करीब पांच से छह करोड़ वर्ष हले शुरू हुई, जब पृथ्वी के अंदर खिसकती चट्टानों ने गर्म मैग्मा को ऊपर उठने के लिए मार्ग बनाया। तीन करोड़ साल बाद यह गर्म चट्टानें सतह पर पहुंचीं जिससे स्थल की ऊंचाई में बड़ा परिवर्तन आया।
जीवन के प्रवाह को मिली नई दिशा
इन घटनाओं के परिणामस्वरूप टेथिस सागर का विघटन हुआ और भूमध्य सागर तथा अरब सागर बने। इससे एक प्राकृतिक पुल उभरा, जिसने एशिया और अफ्रीका को जोड़ा और जीवन के प्रवाह को दिशा दी। अगर यह प्रक्रिया कुछ लाख साल और देर से होती तो शायद आज के मनुष्य और कई प्रजातियों की विकास यात्रा एकदम अलग होती। मनुष्य के प्राचीन पूर्वज, जो पहले या से अफ्रीका गए थे, उस समय एशिया में विलुप्त हो गए थे। लेकिन अफ्रीका में उनका विकास हुआ।
ये भी पढ़ें:- बायकॉट तुर्किये की एक और नजीर: BMC नहीं खरीदेगा रोबोटिक लाइफबॉय, कमिश्नर ने की पुष्टि; PAK का समर्थन पड़ा भारी
व्यापक बदलाव की वजह बनी भूगर्भीय हलचल
इस भूगर्भीय बदलाव का प्रभाव केवल जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं रहा। अरब प्रायद्वीप के ऊपर उठने से महासागरों का तापमान बदला, जलवायु में व्यापक परिवर्तन आया और सहारा जैसे क्षेत्र रेगिस्तान में बदल गए, जबकि दक्षिण एशिया में नमी और मानसून की तीव्रता बढ़ी। इस शोध ने यह सिद्ध किया है कि धरती के भीतर की गतिविधियां सिर्फ भूगोल नहीं बल्कि जीवों की किस्मत भी बदल सकती हैं। यह अध्ययन भूगर्भशास्त्र, जलवायु विज्ञान, विकासवादी विज्ञान और जीवों की उत्पत्ति की सजीव तस्वीर पेश करता है।
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एक भूगर्भीय प्रक्रिया ने करीब दो करोड़ साल पहले एशिया और अफ्रीका को एक जमीनी पुल के माध्यम से जोड़ दिया, जिसने न केवल भूगोल बदला बल्कि जीवन की दिशा भी बदल दी। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह शोध कार्य किया है जो नेचर रिव्यूज अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित हुआ है। इसके अनुसार अरब प्रायद्वीप और आज का अनातोलिया (वर्तमान तुर्की का हिस्सा) कभी एक विशाल भूभाग के रूप में अस्तित्व में आए, जिसने दो महाद्वीपों के बीच की दूरी मिटा दी।
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कैसे पुल बना महाद्वीप पर आगमन का रास्ता
बता दें कि यह पुल हाथी, जिराफ, गैंडे, चीते और मनुष्य के पूर्वजों को एक महाद्वीप से दूसरे में जाने का रास्ता देने वाला मार्ग बना। अफ्रीका करीब साढ़े सात करोड़ साल तक अलग-थलग रहा : इससे पहले अफ्रीका करीब साढ़े सात करोड़ साल तक अन्य महाद्वीपों से अलग-थलग रहा। परंतु जैसे ही अरब प्रायद्वीप ऊपर उठा और टेथिस सागर की गहराइयों में परिवर्तन हुआ, अफ्रीका और एशिया एक भूभाग से जुड़ गए। यह भूगर्भीय घटना टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर और मेंटल से उठने वाली गर्म चट्टानों की वजह से संभव हो पाई।
यह प्रक्रिया करीब पांच से छह करोड़ वर्ष हले शुरू हुई, जब पृथ्वी के अंदर खिसकती चट्टानों ने गर्म मैग्मा को ऊपर उठने के लिए मार्ग बनाया। तीन करोड़ साल बाद यह गर्म चट्टानें सतह पर पहुंचीं जिससे स्थल की ऊंचाई में बड़ा परिवर्तन आया।
जीवन के प्रवाह को मिली नई दिशा
इन घटनाओं के परिणामस्वरूप टेथिस सागर का विघटन हुआ और भूमध्य सागर तथा अरब सागर बने। इससे एक प्राकृतिक पुल उभरा, जिसने एशिया और अफ्रीका को जोड़ा और जीवन के प्रवाह को दिशा दी। अगर यह प्रक्रिया कुछ लाख साल और देर से होती तो शायद आज के मनुष्य और कई प्रजातियों की विकास यात्रा एकदम अलग होती। मनुष्य के प्राचीन पूर्वज, जो पहले या से अफ्रीका गए थे, उस समय एशिया में विलुप्त हो गए थे। लेकिन अफ्रीका में उनका विकास हुआ।
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व्यापक बदलाव की वजह बनी भूगर्भीय हलचल
इस भूगर्भीय बदलाव का प्रभाव केवल जीव-जंतुओं तक सीमित नहीं रहा। अरब प्रायद्वीप के ऊपर उठने से महासागरों का तापमान बदला, जलवायु में व्यापक परिवर्तन आया और सहारा जैसे क्षेत्र रेगिस्तान में बदल गए, जबकि दक्षिण एशिया में नमी और मानसून की तीव्रता बढ़ी। इस शोध ने यह सिद्ध किया है कि धरती के भीतर की गतिविधियां सिर्फ भूगोल नहीं बल्कि जीवों की किस्मत भी बदल सकती हैं। यह अध्ययन भूगर्भशास्त्र, जलवायु विज्ञान, विकासवादी विज्ञान और जीवों की उत्पत्ति की सजीव तस्वीर पेश करता है।