सुप्रीम कोर्ट ने दी 24 हफ्ते की गर्भवती महिला को गर्भपात की इजाजत
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अस्पताल की मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक भ्रूण बिना किडनी का है और अन्य विकारों से ग्रस्त है। गर्भावस्था की निरंतरता के कारण पीड़ित मां का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इस पूरे मामले को लेकर सोमवार को केईएम अस्पातल ने सर्वोच्च न्यायलय को रिपोर्ट सौंपी थी। जिसके बाद कोर्ट ने अस्पातल प्रशासन से पीड़ित महिला और याचिकाकर्ता के लिए राय मांगी थी।
बच्चे के जन्म देने पर उसके जीवन को खतरा
पीड़ित महिला की याचिका के अनुसार वह 24 हफ्ते के गर्भवती है और अगर वह अपने बच्चे को जन्म देती है तो उसके जीवन को खतरा है। इसके साथ ही बच्चे की दोनों किडनी बेकार निकल सकती है।
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि अगर महिला बच्चे को जन्म दोती है तो उसका बच्चा चार घंटे से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता है। एक साल में यह दूसरा ऐसा मामला है जब सु्प्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम, 1971 के तहत फैसला सुनाया है।
इससे पहले कोर्ट ने मुंबई के ही ठाणे में 22 साल की एक गर्भवती महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए भी फैसला सुनाया था।