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ब्लैक फंगस: इस बीमारी के लिए केवल स्टेरॉइड्स नहीं है जिम्मेदार, जिन मरीजों को नहीं दिया उन्हें भी म्यूकरमाइकोसिस

Fri, 21 May 2021 06:56 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 21 May 2021 06:56 PM IST
सार

स्टेरॉइड्स के गलत इस्तेमाल से खांसी-बुखार होने की समस्या, लेकिन केवल इसी के कारण म्यूकरमाइकोसिस होने के कोई प्रमाण नहीं...

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The sudden emergence of mucormycosis is attributed to the excessive use of steroids in the treatment of coronavirus
ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

म्यूकर माइकोसिस देश के सामने एक बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है। अब तक दर्जन भर से ज्यादा राज्यों में म्यूकरमाइकोसीस के 5500 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और इसके कारण 126 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। म्यूकरमाइकोसिस के अचानक उभार के पीछे कोरोना के इलाज में स्टेरॉइड्स के अधिक इस्तेमाल को जिम्मेदार माना जा रहा है। स्टेरॉइड्स रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ाने और रोग प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करने का काम करता है। डायबिटीज के रोगियों पर इसका इस्तेमाल घातक हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि देश में अचानक बढ़े म्यूकरमाइकोसिस के मामलों के पीछे डायबिटीज रोगियों पर स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल एक बड़ी वजह हो सकती है।

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लंबे समय से कर रहे हैं इस्तेमाल

हालांकि, सभी विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में रूमेटोलोजी (Rheumatology) की विशेषज्ञ डॉक्टर उमा कुमार ने अमर उजाला से कहा कि वे अपने मरीजों पर लंबे समय से स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करती आ रही हैं, लेकिन इसके पहले कभी यह नहीं देखा गया कि केवल स्टेरॉइड्स के कारण मरीजों को म्यूकर माइकोसिस हुई हो। म्यूकर माइकोसिस हमेशा से रहने वाली बीमारी रही है और स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल भी लंबे समय से लोगों पर किया जाता रहा है। लेकिन अभी तक ऐसी स्थिति सामने नहीं आई। ऐसे में केवल स्टेरॉइड्स को म्यूकर माइकोसिस के बढ़े मामलों की एकमात्र वजह मानना उचित नहीं है। यह कई कारणों के सम्मिलित प्रभाव के कारण हो सकता है और इस पर शोध होना चाहिए।

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जिन मरीजों को नहीं दिए स्टेरॉइड्स उन्हें भी दिक्कत

सीनियर ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर केआर मेघनाद ने कहा है कि ब्लैक फंगस के पीछे केवल स्टेरॉइड्स को जिम्मेदार मानना बिलकुल भी उचित नहीं है। क्योंकि ऐसे मरीजों में भी ब्लैक फंगस की समस्या देखी जा रही है, जिनके कोरोना के इलाज में स्टेरॉइड्स का कभी भी इस्तेमाल नहीं किया गया था। उनके पास 30 मरीज ऐसे आये हैं जो कोरोना से पीड़ित रहे हैं, लेकिन उनके इलाज में कभी भी स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल नहीं हुआ था। इसके बाद भी उन्हें ब्लैक फंगस का सामना करना पड़ा। ऐसे रोगियों में एक तीन साल का छोटा बच्चा भी शामिल है। ऐसे में केवल स्टेरॉइड्स को ब्लैक फंगस का कारण नहीं बताया जा सकता। उन्होंने भी म्यूकर माइकोसिस के कारणों को जानने के लिए और अधिक रिसर्च की जरूरत बताई है।

विशेषज्ञ के अनुसार, चूंकि ब्लैक फंगस की समस्या दूसरे रोगियों में भी देखी जा रही है, कोरोना से स्वस्थ हुए सभी मरीजों को ब्लैक फंगस जैसे लक्षणों के प्रति सावधान रहना चाहिए। अगर उन्हें आंखों, गाल पर जलन, फूलापन, नाक के खून मिश्रित स्राव या खून की उल्टी होने पर सावधान हो जाना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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क्या हैं स्टेरॉइड्स

दरअसल, स्टेरॉइड्स एक प्राकृतिक पदार्थ हैं जिन्हें हमारा शरीर स्वयं निर्मित करता है। इससे हमारी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हड्डियों की संधियां मजबूत बनी रहती हैं। लेकिन अब इन्हें रासायनिक रूप से भी प्राप्त किया जाता है। एथलीट, बॉडी बिल्डिंग करने वाले और कई खिलाड़ी भी इनका इस्तेमाल करते हैं जिससे शरीर की मांसपेशियों को एक बेहद सुडौल रूप दिया जाता है।

लेकिन स्टेरॉइड्स के बिना चिकित्सकीय इस्तेमाल को डॉक्टर कभी भी सही नहीं मानते हैं क्योंकि यह शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को बढ़ाता है और रोग प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करता है। रोग प्रतिरोधी क्षमता के कमजोर होने के कारण स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से  खांसी-बुखार जैसी बीमारियां हो सकती हैं (इसी कारण इसे म्यूकर माइकोसिस से भी जोड़ा जा रहा है)।

स्टेरॉइड्स के इन्हीं नकारात्मक असर को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय खेलों में इनके उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। कई स्टेरॉइड्स के इस्तेमाल होने पर खिलाड़ियों को डोप टेस्ट में फेल पाया जाता है जिसके कारण उन्हें खेल प्रतिस्पर्धा से बाहर निकाल दिया जाता है।

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