रेल पटरियों पर नहीं गिरेगा ह्यूमन वेस्ट, 1.4 लाख लगाए जाएंगे बायो टॉयलेट
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रेलवे के सभी कोचों में जल्द ही बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी अमित गर्ग का कहना है कि 35,000 कोचों में 1.4 लाख बायो टॉयलेट की इकाई लगाई जाएंगी। अभी तक रेलवे में पारंपरिक शौचालय ही होते हैं और मानव मल को पटरियों पर ही छोड़ दिया जाता है। इससे रेलवे की संपत्ति को तो नुकसान होता ही है साथ ही पर्यावरण भी दूषित होता है। बायो टॉयलेट से शौचालय बदबू रहित और गंदगी रहित होंगे। यहां तक कि इनमें कॉकरोच और मच्छर जैसे कीड़े मकौड़े भी नहीं आएंगे।
आपको बता दें कि बायो टॉयलेट का आविष्कार रेलवे और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) द्वारा किया गया है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इनमें शौचालय के नीचे बायो डाइजेस्टर कंटेनर होते हैं जिनमें एनेरोबिक बैक्टीरिया होते हैं, जिनकी सहायता से मानव मल को पानी और गैस में तब्दील हो जाता है। इस प्रकार के टॉयलेट से पानी की भी बचत होती है। क्योंकि यह वैक्यूम तकनीक से युक्त होते हैं। फिर दूषित पानी को ट्रैक पर छोड़ दिया जाता है और गैस को वातावरण में छोड़ दिया जाता है।
अधिकारियों के मुताबिक मुंबई की बाहरी ट्रेनों में पश्चिमी रेलवे के 800 कोच और सेंट्रल रेलवे के 1,000 कोचों में बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे। रेलवे का लक्ष्य है कि 2019 तक 55,000 कोचों में बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे। इस पर सीएजी का कहना है कि काम बिना खामियों के पूरा नहीं हुआ है। 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण में यह पता चला कि फ्लशिंग सिस्टम और अपर्याप्त पानी की सप्लाई के कारण 223 बायो टॉयलेट में दुर्गंध पाई गई।
पश्चिमी रेलवे के एक अधिकार ने बताया कि उन्हें बायो टॉयलेट से संबंधित बहुत सी शिकायतें मिलीं कि उनमें बदबू आ रही है या वो गंदगी से भरे हुए हैं। इनका मुख्य कारण है कि यात्रियों को बायो टॉयलेट का इस्तेमाल करना नहीं आता और वह टॉयलेट में ही प्लास्टिक आदि फेंक देते हैं। सीएजी की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि दक्षिणी रेलवे के अलावा किसी और जोन में बायो टॉयलेट की जागरुकता के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया।
सेंट्रल रेलवे के अधिकारी ने कहा कि बायो टॉयलेट की साफ सफाई और रखरखाव के लिए रेलवे स्टाफ को ट्रेनिंग देना बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें ट्रेनिंग तब दी जा सकती है जब ट्रेन स्टेशन पर रुकें। इसके साथ ही ट्रेन में सवार स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। रेलवे का ये उद्देश्य होगा कि ग्रीन स्टेशन्स बनाए जाएं यानि सभी स्टेशन 100 फीसदी बायो टॉयलेट युक्त हों। इससे रेलवे ट्रैक भी बिल्कुल साफ रहेंगे। इस योजना के तहत कटरा का श्री माता वैष्णों देवी स्टेशन, रामेश्वरम, मछलीपटनम और पोरबंदर का ओखा स्टेशन शामिल हैं।