{"_id":"679393989efa698901076f75","slug":"the-post-of-treasurer-in-bangalore-advocates-association-will-be-reserved-for-a-woman-lawyer-sc-ordered-2025-01-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: 'बंगलूरू अधिवक्ता संघ में कोषाध्यक्ष का पद महिला वकील के लिए होगा आरक्षित', सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: 'बंगलूरू अधिवक्ता संघ में कोषाध्यक्ष का पद महिला वकील के लिए होगा आरक्षित', सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
Fri, 24 Jan 2025 06:50 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 24 Jan 2025 06:50 PM IST
सार
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश दिया कि बंगलूरू अधिवक्ता संघ में कोषाध्यक्ष का पद महिला वकील के लिए आरक्षित रखा जाए। वकीलों के विभिन्न निकायों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का यह सही समय है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अधिवक्ता संघ में महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बंगलूरू अधिवक्ता संघ में कोषाध्यक्ष का पद महिला वकील के लिए आरक्षित रखा जाए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया। बंगलूरू अधिवक्ता संघ का चुनाव दो फरवरी को होना है नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्देश देते हैं कि कोषाध्यक्ष का पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किया जाए। अदालत ने कहा कि वकीलों के विभिन्न निकायों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का यह सही समय है। क्योंकि एसोसिएशन की महिला उम्मीदवारों के लिए सीटें निर्धारित करने के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
विज्ञापन
खंडपीठ ने चुनाव करा रही उच्च अधिकार समिति और मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया कि अगर जरूरी हो तो वह नामांकन प्राप्त करने की तारीख आगे बढ़ा सकते हैं और कुछ दिन के लिए चुनाव स्थगित कर सकते हैं। यह निर्णय समिति और मुख्य चुनाव अधिकारी के विवेक पर आधारित होगा।
विज्ञापन
शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि समिति और चुनाव अधिकारी को यह तय करना चाहिए कि बंगलूरू अधिवक्ता संघ की शासी परिषद में 30 फीसदी सदस्य ऐसी महिला उम्मीदवार होनी चाहिए, जिनको 10 साल का कार्य अनुभव है। शीर्ष अदालत ने एक महिला वकील की याचिका पर सुनवाई की। इसमें मांग की गई थी कि दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की तरह महिला आरक्षण लागू किया जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मी अयंगर ने पीठ से अनुरोध किया कि गवर्निंग काउंसिल में युवा वकीलों की अधिक भागीदारी के लिए 10 वर्ष के अनुभव के मानदंड में ढील दी जाए। पीठ ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और आदेश दिया कि दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन चुनाव मामले की तरह ही 10 वर्ष के अनुभव के मानदंड में ढील देते हुए बंगलुरू एडवोकेट एसोसिएशन में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जाए। कोर्ट ने बंगलूरू अधिवक्ता संघ को आदेश दिया और जवाब दाखिल करने के लिए कहा।
पिछले साल शीर्ष अदालत ने दिया था ये निर्देश
पिछले साल 18 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) चुनाव में महिला वकीलों के लिए तीन पद आरक्षित करने का निर्देश दिया था। पीठ ने यह भी निर्देश दिया था कि जिला बार एसोसिएशन के चुनावों में कोषाध्यक्ष का पद और अन्य कार्यकारी समिति के 30 प्रतिशत पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित रहेंगे (जिनमें पहले से ही महिलाओं के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं)। पिछले साल 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने डीएचसीबीए को निर्देश दिया था कि वह एसोसिएशन के पांच सदस्यीय पदाधिकारी निकाय में एक अन्य पद के अलावा कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित रखे।
पीठ ने निर्देश दिया था, 'बार एसोसिएशन की आम सभा कोषाध्यक्ष का पद विशेष रूप से बार एसोसिएशन की महिला सदस्यों के लिए आरक्षित करने पर विचार करेगी।' पीठ ने कहा था, महिला सदस्यों के लिए कोषाध्यक्ष का पद आरक्षित करने के अलावा, आम सभा को बार एसोसिएशन की महिला सदस्यों के लिए पदाधिकारी का एक और पद आरक्षित करने की वांछनीयता पर विचार करने की भी स्वतंत्रता होनी चाहिए।
'10 कार्यकारी सदस्यों में से कम से कम तीन महिला सदस्य'
शीर्ष अदालत ने पहले निर्देश दिया था, 'इसी तरह, 10 कार्यकारी सदस्यों में से कम से कम तीन महिला सदस्य होंगी। आम सभा यह भी तय कर सकती है कि कार्यकारी समिति की तीन महिला सदस्यों में से कम से कम एक वरिष्ठ नामित अधिवक्ता होगी।' पिछले साल 2 मई को बार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से जारी आदेश में न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की कार्यकारी समिति में 33 प्रतिशत पद महिला सदस्यों के लिए आरक्षित किए जाएं।