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उच्च न्यायालय ने केंद्र से पूछा- क्या शादीशुदा लोगों में कम बुद्धि होती है? ये है पूरा मामला

Fri, 19 Jul 2019 04:41 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Fri, 19 Jul 2019 04:41 AM IST
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The High Court asked the Center- Do the married people have less wisdom? Know the whole PIL case
Delhi High Court

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र से पूछा कि क्या विवाहित लोगों में बुद्धिमत्ता की कमी होती है कि उन्हें सैन्य बलों की कानूनी शाखा ‘जज एडवोकेट जनरल’ (जैग) हेतु भर्ती के लिए अयोग्य माना जाता है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि  

अविवाहित पुरुष या महिला विवाहितों से बेहतर कैसे हैं? विवाहित होने पर पुरुष या महिला में क्या कम हो जाता है? बुद्धिमत्ता? अगर व्यक्ति लिव-इन संबंधों में रह रहा हो तो क्या होगा? अगर किसी का तलाक हुआ हो तो क्या होगा?

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पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये सवाल उठाए जिसमें सेना की कानूनी शाखा ‘जैग’ में चयन के लिए शादीशुदा लोगों पर रोक को चुनौती दी गई है। अदालत ने याचिकाकर्ता कुश कालरा के वकील से अन्य देशों खासकर विकसित देशों में सैन्य बलों की कानूनी शाखा में शादीशुदा लोगों की भर्ती के संबंध में स्थिति पता करने को कहा।

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अदालत ने यह निर्देश देते हुए आगे की सुनवाई के लिए छह नवंबर की तारीख तय की। इससे पहले, केंद्र ने दलील दी थी कि विवाह करने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है और यह संविधान के तहत जीवन जीने के अधिकार के दायरे में नहीं आता है। 

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