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अडानी समूह पर मेहरबान मोदी सरकार, 200 करोड़ का जुर्माना माफ
एजेंसी/नई दिल्ली
Updated Sat, 02 Jul 2016 08:56 PM IST
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- फोटो : PTI
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किसी को भी नहीं बख्शने का दावा करने वाली केंद्र की मोदी सरकार ने अडानी समूह पर लगे 200 करोड़ रुपये के जुर्माने को माफ कर दिया है।
पीएम मोदी से अपनी कथित नजदीकियों के कारण कई बार सुर्खियों में रहे गौतम अडानी ही इस समूह के मालिक हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने अडानी समूह पर यह जुर्माना लगाया गया था। लेकिन मोदी सरकार ने जुर्माना लगाने के फैसले को रद कर दिया है।
2012 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मुंदड़ा प्रोजेक्ट से पर्यावरण को हुए नुकसान के आरोपों की जांच के लिए सुनीता नारायण की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को हुए व्यापक नुकसान और अवैध तरीके से जमीन लेने जैसी बातों को खुलासा किया है।
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पीएम मोदी से अपनी कथित नजदीकियों के कारण कई बार सुर्खियों में रहे गौतम अडानी ही इस समूह के मालिक हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कारण पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने अडानी समूह पर यह जुर्माना लगाया गया था। लेकिन मोदी सरकार ने जुर्माना लगाने के फैसले को रद कर दिया है।
2012 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मुंदड़ा प्रोजेक्ट से पर्यावरण को हुए नुकसान के आरोपों की जांच के लिए सुनीता नारायण की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को हुए व्यापक नुकसान और अवैध तरीके से जमीन लेने जैसी बातों को खुलासा किया है।
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यूपीए सरकार के दौरान की गई थी जुर्माना लगाने की सिफारिश
समिति ने परियोजना के उत्तरी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाने और क्षतिपूर्ति के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत या 200 करोड़ रुपये जो भी अधिक हो, वसूलने की सिफारिश की थी।
समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए मंत्रालय ने अडानी पोर्ट एंड सेज को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
हालांकि तत्कालीन यूपीए सरकार में मंत्रियों के फेरबदल (पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन की जगह वीरप्पा मोइली ने ली) कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका था। लेकिन सरकार बदलने के बाद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सितंबर 2015 में जुर्माने को रद कर दिया।
समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए मंत्रालय ने अडानी पोर्ट एंड सेज को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
हालांकि तत्कालीन यूपीए सरकार में मंत्रियों के फेरबदल (पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन की जगह वीरप्पा मोइली ने ली) कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका था। लेकिन सरकार बदलने के बाद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सितंबर 2015 में जुर्माने को रद कर दिया।