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कोरोना का कहर: मौतों ने बढ़ाई केंद्र में 'दयालु' आधार पर दी जाने वाली नौकरी की प्रतीक्षा सूची, कैसे मिलेंगे एक करोड़ रुपये
Mon, 31 May 2021 06:25 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 31 May 2021 06:25 PM IST
सार
केंद्रीय सचिवालय सेवा फोरम के महासचिव मनमोहन वर्मा के मुताबिक, ऐसे कार्मिकों से रिक्त हुए स्थान को वित्तीय मदद नहीं भर सकती, लेकिन उनके परिवार को इससे थोड़ा बहुत सहारा मिल जाता है। इनके आश्रितों को यह अहसास रहता है कि केंद्र सरकार ने उनकी सेवाओं को तव्वजो दी है...
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सरकारी कर्मचारी
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विस्तार
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जो कहर बरपाया है, उसमें केंद्र सरकार के अनेक कर्मी और अधिकारी मारे गए हैं। ऐसे कार्मिकों के आश्रितों को 'दयालु' आधार पर नौकरी देने के लिए साल 2013 में प्रावधान शुरू किया गया था। उसके तहत केंद्र सरकार के 'ग्रुप सी' के कर्मी, जो ड्यूटी पर मारे जाते हैं या मेडिकल आधार पर रिटायर कर दिए जाते हैं, उनके आश्रितों को नौकरी प्रदान की जाती है। इसके लिए पांच फीसदी कोटा निर्धारित किया गया है। इस कोटे के तहत नौकरी पाने वालों की प्रतीक्षा सूची पहले से ही लंबी चल रही थी। अब कोरोना के कहर ने इस सूची को एकाएक और ज्यादा बढ़ा दिया है।
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इसके चलते केंद्रीय सचिवालय सेवा फोरम, जिसमें सीएसएस ग्रुप 'बी' अधिकारी और सीएसएस संगठित समूह 'ए' अफसर शामिल हैं, उन्होंने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि कोविड 19 की वजह से मारे गए ग्रुप ए और बी कार्मिकों के आश्रितों को एक करोड़ रुपये और नौकरी तुरंत प्रदान की जाए। उनकी पेंशन का अविलंब निपटारा हो।
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फोरम के महासचिव मनमोहन वर्मा ने अपने पत्र में कहा है, कोविड के चलते साठ से ज्यादा कार्मिक मारे गए हैं। इनमें बहुत से कर्मी ऐसे रहे हैं, जिनकी आयु 21 से 30 साल के बीच रही है। इन कार्मिकों ने कोरोना महामारी के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर बनकर काम किया था। चूंकि यह सेवा देश की पुरानी सेवाओं में से एक है, इसलिए देश में नीतियां बनाने से लेकर उनके क्रियान्वयन और बजट आदि के निर्धारण में सीएसएस कार्मिकों की अहम भूमिका रही है। ये कार्मिक कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में नियमित तौर पर कार्यालय आते रहे हैं। सीएसएस ने कोविड-19 में अपने कई मेहनती और कार्यकुशल अधिकारियों को खो दिया।
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मनमोहन वर्मा के मुताबिक, ऐसे कार्मिकों से रिक्त हुए स्थान को वित्तीय मदद नहीं भर सकती, लेकिन उनके परिवार को इससे थोड़ा बहुत सहारा मिल जाता है। इनके आश्रितों को यह अहसास रहता है कि केंद्र सरकार ने उनकी सेवाओं को तव्वजो दी है। केंद्र सरकार ने इस तरह के मामलों में 2013 के दौरान 'दयालु' आधार पर नियुक्ति देने का नियम बनाया था। अगर ग्रुप सी का कोई कार्मिक ड्यूटी पर मारा जाता है या मेडिकल आधार पर उसे रिटायर कर दिया जाता है तो उस स्थिति में उसके आश्रितों को पांच फीसदी कोटे के तहत नौकरी दी जाती है। इसमें केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय, विभाग और सीएसएस आदि के कार्मिक शामिल हैं।
केंद्रीय सचिवालय सेवा फोरम ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोरोना की वजह से मारे गए सीएसएस कार्मिकों को तुरंत पेंशन लाभ प्रदान किया जाए। केंद्र सरकार, एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और नौकरी, बिना किसी देरी के प्रदान करे। दयालु आधार पर नियुक्ति का कोटा दिया जाए। हालांकि इसमें लंबी सूची है, इसलिए दयालु आधार पर उक्त राशि और नौकरी प्रदान की जाए। पेंशन जारी करने के लिए कई बार लम्बा समय लग जाता है। बहुत से दस्तावेज़ जमा कराने पड़ते हैं। कई बार ऑब्जेक्शन लग जाता है। सरकार, अब पेंशन तुरंत जारी कराए।