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किसान आंदोलन: एक म्यान में कई तलवारें डाल कर निश्चिंत हुई केंद्र सरकार, अब करो नतीजे का इंतजार    

Tue, 01 Dec 2020 12:11 AM IST
संजीव कुमार झा जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 01 Dec 2020 12:11 AM IST
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The central government makes new strategy for resolving issues regarding farmers protest and new farm bill
किसानों का प्रदर्शन(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन के पांचवें दिन दो बातें स्पष्ट कर दी हैं। पहली, तीनों कानून वापस नहीं होंगे। दूसरा, किसानों के बीच जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह बहुत जल्द दूर हो जाएगा। कहावत तो यह थी कि एक म्यान में दो तलवार नहीं आ सकती, लेकिन किसान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उस म्यान में दो नहीं, बल्कि कई तलवारें डाल दी गई हैं। सरकार को उम्मीद है कि नतीजा उसके पक्ष में आएगा। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष बूटा सिंह ने कहा है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनकी बातचीत हुई है। वे लोग 36 नुमाइंदों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं।

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दूसरी ओर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने सोमवार को जारी अपने बुलेटिन में कहा है कि वे किसान संगठनों के साथ हैं। सरकार अब भी दावा कर रही है कि उसे खेती के कानूनो से होने वाले लाभ के प्रति जागरूकता पैदा करनी है, जबकि किसान इस बात से स्पष्ट हैं कि ये कानून उनकी कीमत पर केवल कारपोरेट को आजादी, कारपोरेट को अवसर और कॉरपोरेट की आमदनी बढ़ाने के लिए हैं। केंद्र सरकार ने साफतौर पर कह दिया है कि न तो मंडी खत्म होगी और न ही एमएसपी को बंद किया जाएगा।
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किसानों का भ्रम जल्द दूर करेंगे
किसान आंदोलन जितना लंबा खिंच रहा है, वह सरकार के फायदे में जाता हुआ दिख रहा है।इस आंदोलन में पंजाब के 30 प्रमुख किसान संगठन भाग ले रहे हैं, जबकि एआईकेएससीसी सहित दर्जनभर दूसरे संगठन भी किसानों के मुद्दों पर बात करते हैं।यूपी के किसान संगठन भी इन्हीं में शामिल हैं। केंद्र सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, ताजा इंटेलिजेंस रिपोर्ट बताती है कि अब किसान आंदोलन में प्रमुखता से बात कौन करेगा, इस पर चर्चा होने लगी है। बुराड़ी जाने के लिए कुछ संगठन तैयार हो गए थे, बाद में उन्हें मना कर दिया गया।
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दरअसल, यह आंदोलन पूरे देश में नहीं हो रहा है।अभी इसमें पंजाब और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसान भाग ले रहे हैं।हालांकि बाहुल्य पंजाब के किसानों का है। सरकार ने आंदोलन के पहले ही दिन यह भांप लिया था कि ये दो तीन राज्यों का आंदोलन है। उक्त अधिकारी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, आप देखें कि ये किसान पंजाब से आए हैं।हरियाणा में भी अच्छी खेतीबाड़ी है। यहां से किसान क्यों नहीं दिल्ली आ रहे।अधिकारी के अनुसार, इसे हल्के में न लें। इसका कारण समझने का प्रयास करें।हरियाणा में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और इनेलो का किसानों में अच्छा खासा जनाधार रहा है।

अगर हुड्डा या अभय चौटाला चाहते तो वे हजारों किसानों को दिल्ली रवाना कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ये दोनों ही नेता आंदोलन से दूर हैं। जब कोई नेतृत्व करने वाला ही नहीं है तो किसान किसके सहारे आगे बढ़ेगा। केंद्र सरकार ने कथित तौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जिन्हें अभी केंद्रीय जांच एजेंसियों से छुटकारा नहीं मिला है, को समझा दिया था।इनेलो और भाजपा के रिश्ते उतरे खराब नहीं हैं, जबकि जजपा वाले खुद खट्टर सरकार में शामिल हैं। ऐसे में किसान किसके भरोसे दिल्ली जाएगा।इन सब कारणों के चलते ही केंद्र सरकार मजबूत स्थिति में आ गई। केंद्र के दो मंत्रियों रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर के अलावा खुद प्रधानमंत्री का बयान भी यह समझने के लिए काफी है कि केंद्र सरकार झुकने वाली नहीं है।

केंद्र सरकार के अधिकारी ने बताया, किसान संगठनों के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है। चूंकि पंजाब के किसान आए हैं तो उन्हीं के संगठन फ्रंटफुट पर आकर बात कर रहे हैं। एआईकेएससीसी के नेताओं को लगा था कि वे आंदोलन में प्रमुख चेहरे के तौर पर रहेंगे, लेकिन पंजाब के किसानों ने ऐसा नहीं होने दिया।

हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री के साथ होने वाली बातचीत में एआईकेएससीसी के चार प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।पिछली बार जब केंद्रीय गृहमंत्री ने बातचीत का न्यौता दिया तो कुछ किसान नेता आभार जताने में जुट गए थे। बाद में सभी ने कहा, नहीं बुराड़ी जाने की शर्त मंजूर नहीं है।बातचीत में पंजाब से 30 किसान नेताओं का होना साबित करता है कि ये आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच सका। किसान नेता बूटा सिंह ने कहा है कि बातचीत करेंगे।हालांकि उन्होंने बुराड़ी जाने की अपील को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।


किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा, हमारे पास इतना राशन है कि 4 महीने भी हमें रोड पर बैठना पड़े, तो बैठ लेंगे।देश के सभी हिस्सों में किसान की स्थिति एक समान नहीं है, क्या इसी वजह से दूसरे राज्यों के किसान दिल्ली नहीं पहुँचे, इस बाबत किसान नेता अविक साहा का कहना था, बहुत से राज्यों में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।सभी किसान इन बिलों के विरोध में हैं।

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