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Hindi News ›   India News ›   the All India Muslim Personal Law Board has protested against the UGC's directive to involve students in Surya Namaskar programme to celebrate 75 years of India's Independence, Baba Ramdev had told the reason for this

Controversy Over Surya Namaskar: पहले भी कई बार हो चुका है सूर्य नमस्कार पर विवाद, बाबा रामदेव ने बताई थी इसकी वजह

Tue, 04 Jan 2022 04:07 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 04 Jan 2022 04:07 PM IST
सार

शिक्षा मंत्रालय ने बीते 16 दिसंबर, 2021 को एक पत्र में यह सूचित किया है कि 'आजादी का अमृत महोत्सव के बैनर तले राष्ट्रीय योगासन खेल महासंघ ने 01 जनवरी 2022 से 07 फरवरी 2022 तक सूर्य नमस्कार की एक योजना चलाने का निर्णय लिया है।  26 जनवरी 2022 को सूर्य नमस्कार पर संगीतमय प्रदर्शन की भी योजना है।' बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के जरिए सूर्य नमस्कार को जन-जन तक पहुंचाना है और लोगों को इसके फायदे के बारे में बताना है।
 

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the All India Muslim Personal Law Board has protested against the UGC's directive to involve students in Surya Namaskar programme to celebrate 75 years of India's Independence, Baba Ramdev had told the reason for this
सूर्य नमस्कार करते विद्यार्थी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर स्कूलों में सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश का विरोध किया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने बयान जारी कर कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। यहां पर बहुसंख्यक समुदाय के रीति-रिवाज और पूजा पद्धति को सभी धर्मों के ऊपर थोपा नहीं जा सकता है। मौलाना ने सूर्य नमस्कार कार्यक्रम से मुस्लिम छात्र-छात्राओं को दूर रहने की हिदायत दी है।
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क्या है विवाद? 
शिक्षा मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों को एक जनवरी से सात फरवरी तक अपने स्कूलों में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्देश दिया है।  इस निर्देश को मौलाना ने संविधान के खिलाफ बताया है। 
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मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी का कहना है  स्कूलों में सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं। इसलिए स्कूलों में किसी खास धर्म की पूजा पद्धति को कराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर अगर सरकार को स्कूलों में कोई कार्यक्रम आयोजित कराना है तो उसे देशप्रेम से जुड़े हुए गीत-संगीत आदि का कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए ताकि उसमें सभी धर्मों के लोग उसमें बढ़-चढ़कर के हिस्सा ले सकें। स्कूलों में इस तरह का कार्यक्रम बिल्कुल भी आयोजित नहीं किया जाना चाहिए, जिससे अन्य धर्मों के लोगों को उसे करने में परेशानी पेश आए। 
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सूर्य नमस्कार महायज्ञ में शामिल होते लोग (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
पहले भी हो चुका है विवाद
सूर्य नमस्कार को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। जून 2015 में योग दिवस के मौके पर राजपथ पर 35 मिनट का कार्यक्रम रखा गया था जिसमें 13 तरह के आसन होने थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे। दिल्ली में करीब 35 हजार स्कूली बच्चों ने योग किया था। इसके अलावा देश के कई शहरों में 21 जून को सुबह 7 बजे एक साथ योग किया गया। लेकिन तब इस बात को लेकर विवाद शुरु हो गया।

सरकार ने विवादित विषय होने की वजह से योग दिवस के कार्यक्रम में सूर्य नमस्कार नहीं रखा था, क्योंकि एमआईएम जैसे कुछ राजनीतिक संगठनों और कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सूर्य नमस्कार पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और के सामने झुकने की इजाजत नहीं है। 

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बाबा रामदेव - फोटो : अमर उजाला
बाबा रामदेव ने क्या कहा था
तब इस पूरे विवाद पर योग गुरु बाबा रामदेव ने एक टीवी चैनल से कहा था- 'सूर्य नमस्कार का धर्म से क्या लेना-देना है।' उन्होंने कहा,  ‘सूर्य नमस्कार के विवादास्पद होने का एक कारण यह है कि कुछ लोगों ने इसके साथ मंत्रों का जाप करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं था।’ मुस्लिम समूहों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए बाबा रामदेव ने एक बात ओर जोड़ी। इस्लाम में नमाज अदा करने की मुद्रा और योग आसन के बीच समानता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा ‘जब कोई नमाज पढ़ता है, तो क्या वह वज्रासन जैसा नहीं है?’ 

हालांकि इस पूरे प्रकरण पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो तब भाजपा के सांसद थे उन्होंने भी विवादित टिप्पणी कर दी थी। आदित्यनाथ ने कहा था, 'जिन लोगों को योग से दिक्कत है उन्हें भारत छोड़ देना चाहिए।'

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ॐ की ध्वनि शाश्वत है - फोटो : अमर उजाला
2016 में 'ॐ पर हुआ विवाद
अगले साल यानी 2016 के योग दिवस पर किसी तरह के विवाद से बचने के लिए कार्यक्रम में सूर्य नमस्कार को शामिल नहीं किया गया लेकिन विवाद नए बात पर शुरु हो गया। इस बार 'ॐ' के उच्चारण को लेकर राजनीतिक दलों और मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई। दरअसल सरकार ने इस साल के योग दिवस के लिए जो प्रोटोकॉल जारी किया था, उसमें योग सत्र की शुरुआत ॐ के जाप के साथ करना था। कई राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों ने कहा कि सरकार इस बहाने अपने हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है। मुस्लिम संगठनों ने कहा कि उनके समुदाय के लोग ॐ का जाप नहीं करेंगे।

हालांकि, तब आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनिल कुमार  गनेरीवाला ने कहा कि योग सत्र के दौरान 'ॐ' का जाप करना अनिवार्य नहीं किया गया है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और 'ॐ' के उच्चारण के दौरान कोई शख्स चाहे तो चुप रह सकता है।
 

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मोहम्मद कैफ - फोटो : The indian express
क्रिकेटर मोहम्मद कैफ भी घिर गए थे विवादों में
अगले साल जनवरी 2017 में क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने 'सूर्य नमस्कार' की कुछ तस्वीरें ट्विटर पर पोस्ट की। जिसके बाद वे ट्रोल होने लगे। योग आसन करने के लिए कैफ कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए। इस्लाम का पालन नहीं करने पर उनकी खूब आलोचना हुई थी। कैफ ने अपने बचाव में कहा ‘सभी तस्वीरों में, मेरे दिल में अल्लाह था। समझ में नहीं आता कि चाहें सूर्य नमस्कार करें या जिम में कोई व्यायाम इसका धर्म से क्या लेना-देना है। इससे सभी को फायदा होता है।’ 

तब भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी ने मोहम्मद कैफ का समर्थन किया। शमी ने ट्रोलर्स को जवाब देते हुए ट्वीट किया, 'मोहम्मद कैफ आप पर गर्व है कैफ भाई क्या बात है। यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है सूर्य नमस्कार शरीर की पूरी कसरत है।'
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