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Border Issue: चीन से सीमा विवाद पर सरकार के बयान से थरूर असंतुष्ट, असम के मुख्यमंत्री ने कही यह बात
Wed, 14 Dec 2022 04:42 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 14 Dec 2022 04:42 PM IST
सार
थरूर की टिप्पणी से एक दिन पूर्व मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बयान दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि चीनी सैनिकों ने 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर यथास्थिति को "एकतरफा" बदलने की कोशिश की।
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शशि थरूर
- फोटो : Social Media
विस्तार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ झड़प को लेकर सरकार के बयान पर बुधवार को असंतोष प्रकट किया। थरूर ने कहा कि बगैर स्पष्टीकरण के छोटा सा बयान देना अलोकतांत्रिक है। उन्होंने भारत-चीन सीमा विवाद पर सरकार द्वारा संसद में चर्चा नहीं कराने की भी आलोचना की।
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वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि भारतीय सेना चीनी सेना की आंखों में देख रही है। हमारी सेना तय करेगी कि कब कौन सी जानकारी साझा करनी है और किसको विश्वास में लेना है और यह सेना की रणनीति के आधार पर होगा। सेना की सहमति से जो भी जानकारी साझा करने की जरूरत होगी, उसे रक्षा मंत्री साझा करेंगे।
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थरूर की टिप्पणी से एक दिन पूर्व मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बयान दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि चीनी सैनिकों ने 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर के यांग्त्से इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर यथास्थिति को "एकतरफा" बदलने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने मजबूती के साथ उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। सीमा पर हुई झड़प को लेकर कांग्रेस सरकार से संसद में चर्चा की मांग कर रही है। पार्टी ने सरकार पर सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया है।
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बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों से चर्चा में थरूर ने कहा कि बिना किसी स्पष्टीकरण के और बिना किसी प्रश्न या दूसरों के विचारों को सुने एक छोटा बयान देना लोकतंत्र नहीं है। हम पिछले कुछ समय से कह रहे हैं कि संसद विचार विमर्श के लिए है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर ने कहा कि यह सरकार के लिए देश के लोगों के प्रति जवाबदेह होने का अवसर है। पांच साल से चीनी हमारी एलएसी पर घुसपैठ कर रहे हैं या इसकी कोशिश कर रहे हैं। 2017 में चीन के साथ डोकलाम टकराव के नौ दिसंबर को तवांग तक लगातार घटनाएं हो रही हैं। गलवान घाटी, देपसांग, हॉट स्प्रिंग के भी मामले हुए हैं। थरूर ने कहा कि सरकार को समग्र जानकारी देना चाहिए और जनता से बात करना चाहिए तथा कुछ सवालों के जवाब देना चाहिए।
1962 की जंग के वक्त पं. नेहरू ने कराई थी बहस
कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसे मामलों में चर्चा कराना सामान्य बात है। उन्होंने 1962 की भारत चीन जंग का जिक्र करते हुए कहा कि तब तत्कालीन पीएम पं. जवाहर लाल नेहरू जी ने संसद में बहस कराई थी। इतना ही नहीं उन्होंने सांसदों में से 100 वक्ताओं की बात सुनी थी और ठोस जवाब पेश किया था। तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि हम इसी तरह का रचनात्मक विचार विमर्श चाहते हैं। थरूर ने इस दलील को खारिज कर दिया कि सरकार संवेदनशील मामला होने के कारण सरकार सीमा संघर्ष के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकती।
एलएसी पर चीनी सेना की हरकतों का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा कि हम हैरान हैं कि सरकार लोगों के प्रति खुद को जवाबदेह ठहराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती है। कोई भी सरकार से कोई गोपनीय जानकारी नहीं मांग रहा है, लेकिन उन्हें निश्चित रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी समग्र सोच क्या है।
गलवान में हुआ था दशकों का सबसे गंभीर संघर्ष
बता दें, जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों की सेना के बीच संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में काफी गिरावट आई है। दशकों बाद दोनों पक्षों के बीच गलवान में सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों और भारी हथियारों के साथ पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैनाती बढ़ा दी। पूर्वी लद्दाख में टकराव व गतिरोध के बाद भारतीय सेना ने पूर्वी कमान के एलएसी इलाके में अपनी ताकत को बढ़ाया है।