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अज्ञात लोगों ने तिरुवल्लुवर की मूर्ति पर फेंका था गोबर, अब हिंदू मक्कल काची के सदस्यों ने चढ़ाए फूल

Wed, 06 Nov 2019 01:58 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 06 Nov 2019 01:58 PM IST
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Thanjavur Members of Hindu Makkal Katchi garland the statue of Thiruvalluvar with flowers
मूर्ति पर माला चढ़ाते सदस्य - फोटो : ANI

भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई ने तीन नवंबर को तमिल कवि और महान दार्शनिक तिरूवल्लुवर की एक तस्वीर को अपने ट्वीटर अकाउंट से पोस्ट किया था, जिसमें वो भगवा पोशाक में हैं। इसके बाद चार नवंबर को तंजावूर में तड़के कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी मूर्ति पर गोबर फेंक दिया, जिसके बाद से ही तमिलनाडु में इस बात को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। 

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वहीं, अब हिंदू मक्कल काची के सदस्यों ने पिल्लारपट्टी में तिरुवल्लुवर की मूर्ति को फूलों के माला पहनाई। साथ ही रुद्राक्ष और एक भगवा 'अंगवस्त्रम' को उनकी मूर्ति के ऊपर पहनाया। गौरतलब है कि चार नवंबर को मूर्ति को अपवित्र कर दिया गया था। 
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इससे पहले, भाजपा की तमिलनाडु इकाई द्वारा तिरुवल्लुवर की पोस्ट की गई तस्वीर को लेकर तमिलनाडु में विरोध हुआ। इस तस्वीर में तमिल कवि और महान दार्शनिक तिरूवल्लुवर को भगवा पोशाक में और माथे और बांहो पर विभूति (राख) लगा हुआ दिखाया गया। साथ ही तस्वीर में तिरूवल्लुवर के माथे पर तिलक है गले में रुद्राक्ष की माला को भी दिखाया गया। उसके अगले दिन कुछ अज्ञात लोगों ने तिरुवल्लुवर की मूर्ति पर गोबर फेंक दिया था।

इसके बाद लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि तिरूवल्लुवर का भाजपा द्वारा अपमान किया गया है। लोगों का कहना था कि तिरूवल्लुवर की छवि के साथ किसी भी धार्मिक प्रतीक का प्रयोग नहीं किया जाता है और भाजपा ने ऐसा करके उनका अपमान किया है। 


कौन हैं तिरूवल्लुवर?
माना जाता है कि लगभग 2050 साल पहले तिरुवल्लुवर तमिलनाडु में रहा करते थे। उन्होंने तिरुक्कुरल नामक एक पुस्तक लिखी है, जिसमें 133 अध्याय और 1330 छंद हैं। ये पुस्तक नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाती है और इसे तमिल भाषाओं के प्रतिष्ठित साहित्य में से एक माना जाता है।

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