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Court Clerk Tests: सार्वजनिक परीक्षा में हासिल किए गए अंक RTI के निजी जानकारी नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी
Mon, 11 Nov 2024 04:38 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 11 Nov 2024 04:38 PM IST
सार
जस्टिस एमएस सोनक और जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि ऐसी जानकारी को रोकने से संदेह बना रहता है, जो सार्वजनिक प्राधिकरणों और सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए स्वस्थ नहीं है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि सार्वजनिक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, और उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किया गया अंक निजी जानकारी नहीं हैं, और उनका खुलासा निजता के किसी भी अनुचित आक्रमण के बराबर नहीं होगा। जस्टिस एमएस सोनक और जितेंद्र जैन की खंडपीठ ने कहा कि ऐसी जानकारी को रोकने से संदेह बना रहता है, जो सार्वजनिक प्राधिकरणों और सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए स्वस्थ नहीं है।
अभ्यर्थी ने दायर की थी हाईकोर्ट में याचिका
पीठ ने ओंकार कलमनकर की तरफ से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें पुणे जिला न्यायालय में जूनियर क्लर्क के पद के लिए 2018 में परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किए गए अंकों का विवरण मांगा गया था। बता दें कि कलमनकर भी परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता को लिखित परीक्षा, मराठी और अंग्रेजी टाइपिंग टेस्ट और साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की तरफ से हासिल अंकों को छह हफ्ते के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामला पुणे की जिला अदालत में जूनियर क्लर्क के पद के लिए चयन प्रक्रिया से संबंधित है, जिसके लिए सार्वजनिक विज्ञापन के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
सार्वजनिक प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए- कोर्ट
अदालत ने कहा, इस अर्थ में, यह सार्वजनिक प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। ऐसी चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किए गए अंकों को सामान्य रूप से व्यक्तिगत जानकारी नहीं माना जा सकता है, जिसके प्रकटीकरण का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है। पीठ ने नोट किया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों ने केवल ऐसी व्यक्तिगत जानकारी को छूट दी है, जिसके प्रकटीकरण का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है।
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इंटरव्यू में फेल अभ्यर्थी ने दायर की थी RTI
अदालत ने कहा, चूंकि ऐसी चयन प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, इसलिए ऐसी जानकारी को रोकना और प्रक्रिया के बारे में किसी भी संदेह को बनाए रखने की बजाय उसका खुलासा करना सार्वजनिक हित में होगा। पीठ ने आगे कहा कि सार्वजनिक पद पर चयन के लिए सार्वजनिक परीक्षा के संदर्भ में, यह संदेहास्पद है कि उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किए गए अंकों का खुलासा निजता के किसी भी अनुचित आक्रमण के बराबर होगा। कलमनकर ने भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था और लिखित और टाइपिंग परीक्षा पास की थी, लेकिन साक्षात्कार पास नहीं कर पाए। उन्होंने शुरू में आरटीआई अधिनियम के तहत लोक सूचना अधिकारी और राज्य सूचना आयुक्त से जानकारी मांगी थी, लेकिन उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
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अभ्यर्थी ने दायर की थी हाईकोर्ट में याचिका
पीठ ने ओंकार कलमनकर की तरफ से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें पुणे जिला न्यायालय में जूनियर क्लर्क के पद के लिए 2018 में परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किए गए अंकों का विवरण मांगा गया था। बता दें कि कलमनकर भी परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता को लिखित परीक्षा, मराठी और अंग्रेजी टाइपिंग टेस्ट और साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की तरफ से हासिल अंकों को छह हफ्ते के भीतर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामला पुणे की जिला अदालत में जूनियर क्लर्क के पद के लिए चयन प्रक्रिया से संबंधित है, जिसके लिए सार्वजनिक विज्ञापन के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए थे।
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सार्वजनिक प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए- कोर्ट
अदालत ने कहा, इस अर्थ में, यह सार्वजनिक प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। ऐसी चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किए गए अंकों को सामान्य रूप से व्यक्तिगत जानकारी नहीं माना जा सकता है, जिसके प्रकटीकरण का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है। पीठ ने नोट किया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों ने केवल ऐसी व्यक्तिगत जानकारी को छूट दी है, जिसके प्रकटीकरण का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है।
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इंटरव्यू में फेल अभ्यर्थी ने दायर की थी RTI
अदालत ने कहा, चूंकि ऐसी चयन प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, इसलिए ऐसी जानकारी को रोकना और प्रक्रिया के बारे में किसी भी संदेह को बनाए रखने की बजाय उसका खुलासा करना सार्वजनिक हित में होगा। पीठ ने आगे कहा कि सार्वजनिक पद पर चयन के लिए सार्वजनिक परीक्षा के संदर्भ में, यह संदेहास्पद है कि उम्मीदवारों की तरफ से हासिल किए गए अंकों का खुलासा निजता के किसी भी अनुचित आक्रमण के बराबर होगा। कलमनकर ने भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था और लिखित और टाइपिंग परीक्षा पास की थी, लेकिन साक्षात्कार पास नहीं कर पाए। उन्होंने शुरू में आरटीआई अधिनियम के तहत लोक सूचना अधिकारी और राज्य सूचना आयुक्त से जानकारी मांगी थी, लेकिन उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।