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चकमा देने के लिए घुसपैठ के रूट बदल रहे आतंकी

Wed, 29 Jun 2016 04:37 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/नई दिल्ली
राघवेंद्र नारायण मिश्र/नई दिल्ली Updated Wed, 29 Jun 2016 04:37 AM IST
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terrorist Changing the root of Intrusion

सेना और सुरक्षा बलों को चकमा देने के लिए आतंकी संगठन घुसपैठ के रूट लगातार बदल रहे हैं। पंपोर हमले के बाद गृह मंत्रालय ने सुरक्षा बलों के काफिलों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन सैन्य शिविर भी आतंकियों के निशाने पर हैं।

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गृह मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय से तालमेल कर नई रणनीति पर अमल शुरू करने का निर्णय लिया है। सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि कश्मीर घाटी में लगातार हमले के बाद अब जम्मू क्षेत्र में भी हमले की आशंका है। लखनपुर से जवाहर टनल तक का नेशनल हाईवे क्षेत्र को हमले के दृष्टिकोण से सबसे संवेदनशील माना जा रहा है।
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सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ के अधिकांश रूट भारत-पाक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास हैं। एलओसी पर सेना के जवानों की तैनाती है। सेना ने घुसपैठ के करीब 35 रूट की हाल में पहचान की है। आतंकी इन रूटों में बदलाव करते रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब घुसपैठ के चार परंपरागत रूट हैं। इन रूटों पर बीएसएफ नजर रखती है। हाल के दिनों में घुसपैठ की अधिकांश घटनाएं कुपवाड़ा इलाके से हुई है। कश्मीर घाटी से पीओके से सटे इलाके में आतंकियों के करीब डेढ़ दर्जन लांचिंग पैड सक्रिय हैं।

पंपोर इलाके में लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी पिछले छह महीने से अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे, लेकिन आतंकियों की तलाश नहीं की जी सकी। सूत्रों के मुताबिक घुसपैठ के लिए केरन सेक्टर सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता रहा है। कुपवाड़ा का मछिल सेक्टर वर्तमान में घुसपैठ के लिए ज्यादा इस्तेमाल हुआ है। कुपवाड़ा का तंगधार इलाका भी घुसपैठ के लिहाज से फिलहाल सक्रिय है।


घाटी में सुरक्षा व्यवस्था की गृहमंत्री ने की समीक्षा
जम्मू-कश्मीर के पंपोर में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले की समीक्षा में सुरक्षा संबंधी कई खामियां उजागर हो रही हैं। इन खामियों को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और आईबी प्रमुख दिनेश्वर शर्मा के साथ बैठक की है। अभी सरकार की सबसे बड़ी चिंता अगले माह शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा है, जो पहले से ही आतंकियों के निशाने पर है। हालांकि मंत्रालय इसे रुटीन बैठक बता रहा है। 

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