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दूरसंचार नियामक ने नेट निरपेक्षता को दी हरी झंडी, बनी रहेगी इंटरनेट की आजादी 

Wed, 11 Jul 2018 07:55 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jul 2018 07:55 PM IST
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Telecom Regulatory allow net neutrality to protect freedom of Internet
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दूरसंचार आयोग ने बुधवार को नेट निरपेक्षता (नेट न्यूट्रैलिटी) को हरी झंडी प्रदान कर दी। दूरसंचार नियामक ट्राई ने इसके पक्ष में सिफारिशें की थी। जिसमें कहा गया था कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को नेट निरपेक्षता के मुख्य सिद्धांत यानी इंटरनेट का एक खुला मंच पर कायम रहना चाहिए और किसी तरह के पक्षपात वाले करार नहीं करना चाहिए। इससे इंटरनेट आधारित सामग्री को लेकर किसी भी ग्राहक के साथ भेदभाव पर अंकुश लगेगा। साथ ही इंटरनेट की आजादी बनी रहेगी।  

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दूरसंचार मंत्रालय में हुई आयोग की बैठक में ट्राई द्वारा पिछले साल नेट निरपेक्षता को लेकर की गई सिफारिशों को मंजूर कर दिया गया। नेट निरपेक्षता की कोई परिभाषित परिस्थिति नहीं है। सिद्धांतों के आधार पर कहें तो इसके लागू होने पर इंटरनेट सेवा प्रदाता को अपने नेटवर्क पर हर ट्रैफिक को एक समान तवज्जो देनी होगी। याद रहे कि नेट निरपेक्षता के मसले पर इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और ऐप डेवलेपर के बीच लंबे समय से विवाद है।
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भारत में नेट निरपेक्षता के लिए कोई कानून नहीं है, जबकि कई दूसरे देशों में नेट निरपेक्षता के पक्ष में कानून बन चुका है। इंटरनेट सेवा प्रदाता पहले भी स्काइप जैसी वीडियो कॉलिंग सेवाओं के लिए अलग से चार्ज लेने की बात कर चुके हैं। उन्हें लगता रहा है कि इस तरह के उत्पाद उनके वॉयस कॉलिंग व्यवसाय को नुकसान पहुंचाते हैं। यही नेट निरपेक्षता की मूल भावना के खिलाफ है जिसमें सभी ट्रैफिक को बराबर तवज्जो देने की बात है।  
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कुछ समय पहले फेसबुक ने भारत में दूरसंचार कंपनियों के साथ साझेदारी करके फ्री बेसिक लाने की तैयारी कर ली थी। यह नेट निरपेक्षता के खिलाफ था और भारी विरोध के बाद फेसबुक को यह फैसला वापस लेना पड़ा था। आयोग द्वारा मंजूर ट्राई की सिफारिसों में इंटरनेट शुल्क के बारे में भी लिखा गया है। इसके मुताबिक इंटरनेट शुल्क का नियमन ट्राई करेगा और सेवा प्रदाता जब शुल्क का बदलाव करते हैं। तब इसे फिर से नेट निरपेक्षता के पैमाने पर जांचा जाएगा। 

याद रहे कि नेट निरपेक्षता का सीधा असर उपभोक्ता पर पड़ता है, क्योंकि जो कंपनियां इंटरनेट सेवा प्रदाता से करार करेंगी। उनके कंटेंट तेजी से खुलेगा जबकि जिन्होंने करार नहीं किया है। उन्हें देरी का सामना करना होगा। अगर नेट निरपेक्षता नहीं होगी तो लोगों की इस बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा। 


गौरतलब है कि अमेरिकी रेग्यूलेटर फेडरल कम्यूनिकेशन्स कमीशन ने हाल ही में कहा था कि वो नेट निरपेक्षता को वापस लेने की तैयारी कर रही है जिसे अमेरिका में 2015 में लागू किया गया था। हालांकि अमेरिका में भी नेट निरपेक्षता का जमकर विरोध हुआ था जिसमें दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भी शामिल हुईं।  

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