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HC: ब्रह्मोस डीजी पद पर जयतीर्थ जोशी की नियुक्ति रहेगी बरकरार, तेलंगाना हाईकोर्ट की CAT के आदेश पर रोक
Wed, 07 Jan 2026 10:59 PM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: लव गौर
Updated Wed, 07 Jan 2026 10:59 PM IST
सार
Telangana HC: ब्रह्मोस डीजी पद पर जयतीर्थ आर जोशी की नियुक्ति बरकरार रहेगी। बुधवा को तेलंगाना हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश पर रोक लगी दी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तेलंगाना हाईकोर्ट ने बुधवार (07 जनवरी) को ब्राह्मोस एयरोस्पेस के डायरेक्टर जनरल (डीजी) के रूप में जयतीर्थ आर. जोशी की नियुक्ति को रद्द करने वाले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी.एम. मोहीउद्दीन की खंडपीठ ने यह आदेश जयतीर्थ जोशी और केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
गौरतलब है कि कैट ने 29 दिसंबर 2025 को जोशी की डीजी ब्रह्मोस के पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया था और केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह डीआरडीओ के विशिष्ट वैज्ञानिक शिवसुब्रमणियम नंबी नायडू के दावे पर दोबारा विचार करे। जोशी को 25 नवंबर, 2024 को ब्रह्मोस के डीजी के रूप में नियुक्त किया गया था और उन्होंने 1 दिसंबर, 2024 को पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद नंबी नायडू ने इस नियुक्ति को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट में जोशी की दलील
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में जोशी ने कहा कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई। याचिकाकर्ता नायडू ने भी प्रक्रियात्मक उल्लंघन का कोई ठोस आरोप नहीं लगाया। विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया को 'खाली औपचारिकता' बताना गलत है। जोशी ने यह भी तर्क दिया कि कैट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के अलावा अन्य लोगों पर भी नियुक्ति के लिए विचार किया जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि वह विज्ञापन में तय सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया से गुजरे हैं, इसके बावजूद उन्हें बिना किसी गलती के मानसिक और पेशेवर परेशानी झेलनी पड़ रही है। जोशी के वकीलों ने अपनी दलीलों में सिर्फ वरिष्ठता पर नहीं, बल्कि पद के लिए उपयुक्तता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीजी के पद पर नियुक्ति के लिए तीन उम्मीदवार योग्य पाए गए थे, जिनमें से उच्च-शक्ति समिति ने जोशी का चयन किया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जोशी को पद पर नियुक्त करने के उच्च-शक्ति समिति के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती।
ये भी पढ़ें: Navneet Rana: फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में भाजपा नेता नवनीत राणा को बड़ी राहत, मुंबई कोर्ट ने किया बरी
नंबी नायडू ने दी ये दलीलें
इधर, कैट के सामने नंबी नायडू ने कहा था कि उन्हें तीन प्रधानमंत्री पुरस्कार मिल चुके हैं। रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों में योगदान के लिए उन्हें चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान किसी नागरिक अधिकारी को पहली बार मिला था। उनके पुरस्कार और प्रशंसा पत्र सीधे तौर पर DRDO और ब्रह्मोस परियोजना से जुड़े हैं।
नायडू ने आरोप लगाया कि जोशी की नियुक्ति पहले से तय थी और विज्ञापन प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए की गई। अब अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने चार सप्ताह बाद तय की है। फिलहाल कैट के आदेश पर रोक के चलते जयतीर्थ जोशी डीजी ब्रह्मोस के पद पर बने रहेंगे।
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गौरतलब है कि कैट ने 29 दिसंबर 2025 को जोशी की डीजी ब्रह्मोस के पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया था और केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह डीआरडीओ के विशिष्ट वैज्ञानिक शिवसुब्रमणियम नंबी नायडू के दावे पर दोबारा विचार करे। जोशी को 25 नवंबर, 2024 को ब्रह्मोस के डीजी के रूप में नियुक्त किया गया था और उन्होंने 1 दिसंबर, 2024 को पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद नंबी नायडू ने इस नियुक्ति को चुनौती दी थी।
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हाईकोर्ट में जोशी की दलील
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में जोशी ने कहा कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई। याचिकाकर्ता नायडू ने भी प्रक्रियात्मक उल्लंघन का कोई ठोस आरोप नहीं लगाया। विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया को 'खाली औपचारिकता' बताना गलत है। जोशी ने यह भी तर्क दिया कि कैट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के अलावा अन्य लोगों पर भी नियुक्ति के लिए विचार किया जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि वह विज्ञापन में तय सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया से गुजरे हैं, इसके बावजूद उन्हें बिना किसी गलती के मानसिक और पेशेवर परेशानी झेलनी पड़ रही है। जोशी के वकीलों ने अपनी दलीलों में सिर्फ वरिष्ठता पर नहीं, बल्कि पद के लिए उपयुक्तता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डीजी के पद पर नियुक्ति के लिए तीन उम्मीदवार योग्य पाए गए थे, जिनमें से उच्च-शक्ति समिति ने जोशी का चयन किया। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जोशी को पद पर नियुक्त करने के उच्च-शक्ति समिति के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती।
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नंबी नायडू ने दी ये दलीलें
इधर, कैट के सामने नंबी नायडू ने कहा था कि उन्हें तीन प्रधानमंत्री पुरस्कार मिल चुके हैं। रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों में योगदान के लिए उन्हें चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान किसी नागरिक अधिकारी को पहली बार मिला था। उनके पुरस्कार और प्रशंसा पत्र सीधे तौर पर DRDO और ब्रह्मोस परियोजना से जुड़े हैं।
नायडू ने आरोप लगाया कि जोशी की नियुक्ति पहले से तय थी और विज्ञापन प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए की गई। अब अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने चार सप्ताह बाद तय की है। फिलहाल कैट के आदेश पर रोक के चलते जयतीर्थ जोशी डीजी ब्रह्मोस के पद पर बने रहेंगे।
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