{"_id":"630fcad8c0b09412af24719a","slug":"telangana-cm-kcr-meets-cm-nitish-kumar-and-deputy-cm-tejashwi-yadav-in-patna","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lok Sabha Election: क्या 2024 में पीएम मोदी को कड़ी टक्कर दे पाएंगे सीएम नीतीश?, येचुरी को बदलाव की उम्मीद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Lok Sabha Election: क्या 2024 में पीएम मोदी को कड़ी टक्कर दे पाएंगे सीएम नीतीश?, येचुरी को बदलाव की उम्मीद
सार
राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेता ने बताया कि नीतीश की उम्र और उनके अनुभव का विपक्ष के पास दूसरा इतना सक्रिय चेहरा नहीं है। राजद के लालू प्रसाद यादव भी चाहते हैं कि नीतीश कुमार जनता दल परिवार की एकता के लिए काम करें। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या नीतीश कुमार 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कड़ी टक्कर दे पाएंगे?
विज्ञापन
नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव से तेलंगाना के सीएम केसीआर ने पटना में की मुलाकात।
- फोटो : Twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पटना में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से मिलें। सूत्र बताते हैं कि भेंट मुलाकात में ताजा राजनीतिक हालात, अपने-अपने हित और सामूहिक राजनीतिक हित पर बात हुई। नीतीश कुमार की तरफ 2024 को लेकर उम्मीद की निगाह से केवल केसीआर ने ही नहीं देखा है, अब माकपा महासचिव सीताराम येचुरी को भी नीतीश कुमार के रूप में विकल्प मिलता हुआ नजर आ रहा है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेता ने बताया कि नीतीश की उम्र और उनके अनुभव का विपक्ष के पास दूसरा इतना सक्रिय चेहरा नहीं है। राजद के लालू प्रसाद यादव भी चाहते हैं कि नीतीश कुमार जनता दल परिवार की एकता के लिए काम करें। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या नीतीश कुमार 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कड़ी टक्कर दे पाएंगे?
विज्ञापन
याद कीजिए 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव। शरद यादव की कोशिश थी कि जनता दल परिवार एकजुट होकर बड़ी राजनीतिक ताकत बने। इसकी शुरुआत बिहार से और महागठबंधन के जरिए हो। इस पहल में शरद यादव ने जद(यू), राजद, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस समेत कई दलों को मंच पर ला दिया था। कुछ बाद में इससे छिटक गए थे। बाद में 2017 में नीतीश कुमार भी छिटक कर एनडीए में चले गए थे। शरद यादव और लालू प्रसाद यादव वही दौर, वैसा ही अभियान और शुरुआत देखना चाहते हैं।
विज्ञापन
नीतीश कुमार करें अगुवाई तभी देंगे 2024 में मोदी को चुनौती
राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में शामिल होने के लिए नीतीश कुमार ने कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात की थी। कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव का कहना है कि अभी इसका समय नहीं आया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कौन टक्कर देगा? अभी समय तैयारी और टक्कर देने लायक बनने का है। इसलिए विपक्ष के दलों को इसे ध्यान में रखकर आगे बढऩा चाहिए। नीतीश कुमार का खुद भी मानना है कि यदि विपक्ष के राजनीतिक दल एकजुट हो जाएं तो 2024 में भाजपा को कोई नहीं पूछेगा। नीतीश कुमार की पार्टी और महागठबंधन सरकार के एक मंत्री का कहना है कि 2024 में मोदी को चुनौती देने का मुख्यमंत्री ने मन बना लिया है। कुछ बात है जो उनके दिल में गहराई से लगी है। राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी आश्वस्त हैं कि 2024 में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जाएगी। राजद के एक संस्थापक नेता का कहना है कि नीतीश कुमार को जनता दल(बीजू) के नवीन पटनायक, टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू समेत अन्य से बातचीत की पहल शुरू कर देनी चाहिए। सूत्र बताते हैं कि माकपा की बैठक में सीताराम येचुरी ने भी नीतीश कुमार को 2024 के चेहरे के तौर पर देखना शुरू कर दिया है।
जाति के आगे नहीं चलता धर्म की राजनीति का जोर
शरद यादव का मानना है कि जाति के आगे धर्म का जोर फीका पड़ जाता है। इसी आधार पर वह 2015 के विधानसभा चुनाव की पटकथा तैयार कर रहे थे। जद (यू) के केसी त्यागी कहते हैं कि बिहार में उनकी सरकार जातिगत जनगणना कराएगी। महागठबंधन की सरकार में भी पिछड़ा, अन्य पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक मंत्रियों का ख्याल रखा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि बिहार से देश की राजनीति की दिशा बदलने के लिए जनता दल परिवार के साथ विपक्षी दलों को साथ लाने और जातिगत मुद्दे को साधे रखने की पहल हो सकती है। अगड़ा बनाम पिछड़ा की इस लड़ाई से भाजपा के वोटों में तगड़ी सेंध लग सकती है।
लक्ष्य 100 सीटों पर भाजपा को झटका देना हो, तो 2014 वाले नहीं रहेंगे 2024 में
राजद के लिए चुनाव सर्वेक्षण, प्रचार अभियान आदि में बड़ी भूमिका निभाने वाले सूत्र का कहना है कि 2024 में 2014 वाले को रोकना कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन इसके लिए सभी को एक लक्ष्य पर आना पड़ेगा। सेफोलॉजी से जुड़े एके खान कहते हैं कि 2014 में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 100 सीटों पर हराने के लक्ष्य को पाया जा सकता है। एनडीए को 250 सीटों पर समेटने के बाद 2024 में तस्वीर बदल सकती है और इसकी संभावना है। इस बारे में समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मई 2023 तक का इंतजार कीजिए। अभी राजनीति में काफी कुछ होने वाला है।