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तीन तलाक बिल को आगे भी बढ़ा-चढ़ा कर पेश करेगी भाजपा, बैकफुट पर दिखा विपक्ष

Fri, 29 Dec 2017 03:36 AM IST
संजय मिश्र/अमर उजाल, नई दिल्ली
संजय मिश्र/अमर उजाल, नई दिल्ली Updated Fri, 29 Dec 2017 03:36 AM IST
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Teen talaq: BJP will present bill with aggressive planning
- फोटो : self

इंदिरा गांधी के बाद भाजपा ने केंद्र सरकार के कामकाज की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यों से की है। तीन तलाक को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने की रणनीति के तहत भाजपा ने कहा है कि जो काम राजीव गांधी नहीं कर पाए उसे उसने कर दिखाया है।

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सूत्र बताते हैं कि लोकसभा में तीन तलाक का बिल पेश किए जाने से पहले पार्टी के संसदीय दल की बैठक में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेजेंटेशन के जरिये विस्तार से तीन तलाक बिल की बातें भाजपा सांसदों के समक्ष रखी थी। हालांकि देर शाम बिल लोकसभा में पास होते ही सरकार के हौसले और बुलंद हो गए।
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इससे पहले संसद में प्रसाद ने कहा कि शाहबानो मामले के जरिए जो कार्य राजीव गांधी नहीं कर पाए थे। वो कार्य आज हम कर रहे हैं। तो लोकसभा में बिल पेश करते वक्त प्रसाद ने इसे ऐतिहासिक बिल करार देते हुए महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम बताया। इस बीच भाजपा ने अंदरूनी स्तर पर यह रणनीति बनाई है कि वह सदन के बाहर तीन तलाक बिल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करेगी। 

बैकफुट पर नजर आया विपक्ष, महज औवेसी ने दिखाई आक्रामकता

Teen talaq: BJP will present bill with aggressive planning

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बिल का सीधा विरोध करने के बजाय इसके प्रावधानों पर सवाल उठाए। कुछ प्रावधानों को छोड़ कांग्रेस का नजरिया बिल के समर्थन वाला रहा। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में तीन तलाक बिल पर चर्चा करते हुए इसे संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की। खड़गे ने कहा कि बिल के ऐसे प्रावधान हैं जिन पर तस्वीर स्पष्ट नहीं है।

उन्होंने सजा के प्रावधान को भी गलत बताया। खड़गे ने कहा कि यह सिविल का मामला है इसे क्रिमिनल मामलों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर जेल के प्रावधान से परिवार के पालन-पोषण में मुश्किलें होंगी। बाद में और जटिलता आएंगी। इसलिए उन्होंने बिल को संसदीय समिति के समक्ष भेजने की मांग की।

इसके अलावा कांग्रेस की ओर से सुष्मिता देव ने भी अपने संबोधन में खड़गे की ही लाइन को आगे बढ़ाया। बिल का सीधा विरोध करने के बजाय वे भी कुछ प्रावधानों का विरोध करती नजर आईं। महज सांसद ओवैसी ने बिल पर आक्रामक रूख दिखाया। ओवैसी ने बिल को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया। 

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