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Tawang: चीन सीमा पर 'चाचिन में मनाया गया चरवाह महोत्सव', भारतीय सेना ने बढ़ाया उत्साह

Mon, 17 Jul 2023 04:22 PM IST
Harendra Chaudhary एन. अर्जुन, ईटानगर
एन. अर्जुन, ईटानगर Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 17 Jul 2023 04:22 PM IST
सार

गुवाहाटी स्थित रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि चाचिन में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में पूरे तवांग क्षेत्र के ग्राज़ियरों की उत्साही भागीदारी देखी गई। बुमला दर्रे के पास चाचिन और अन्य पारंपरिक चरागाह क्षेत्र एतिहासिक रूप से स्थानीय मोनपा जीवनशैली की रीढ़ के रूप में काम करते हैं...

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Tawang: grazing Festival celebrated in Chachin on China border
Tawang - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पूर्वोत्तर में चीनी सीमा के पास तवांग क्षेत्र में एक खास तरह का पारंपरिक त्योहार मनाया जाता है, जो वास्तव में चाचिन ग्राज़िंग फेस्टिवल है, जिसे चरवाहा महोत्सव कहा जाता है। पिछले दिनों बुमला दर्रा, अरुणाचल प्रदेश के पास तवांग क्षेत्र के स्थानीय चरवाहों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस दो दिवसीय उत्सव में इसमें भारतीय सेना ने उनका उत्साह बढ़ाया। उनके पशुओं की जांच की, उनको बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए। इसके साथ ही भारतीय सेना ने मेडिकल कैंप भी लगाया, जहां लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण करवाया।

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इसकी जानकारी देते हुए गुवाहाटी स्थित रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि चाचिन में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में पूरे तवांग क्षेत्र के ग्राज़ियरों की उत्साही भागीदारी देखी गई। बुमला दर्रे के पास चाचिन और अन्य पारंपरिक चरागाह क्षेत्र एतिहासिक रूप से स्थानीय मोनपा जीवनशैली की रीढ़ के रूप में काम करते हैं। ये आजीविका के खेती पर निर्भर करते हैं।

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उन्होंने बताया कि उत्सव में स्थानीय चरवाहों की सहायता के लिए एक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। स्थानीय चरवाहों के जानवरों के लिए चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए एक पशु चिकित्सा शिविर का भी आयोजित किया गया था। स्थानीय चरवाहों को हर तरह की जानकारी दी गई ताकि वे अपने पशु धन का उपयोग कर सकें। पशुओं की देखभाल कैसे की जाए इस पर एक व्याख्यान भी दिया गया। यह पहल तवांग क्षेत्र के आसपास के पारंपरिक चरागाहों के महत्व को देखते हुए की गई थी। भारतीय सेना ने यह भी जानने का प्रयास किया गया कि उनको किस तरह की परेशानी आर रही है।

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रावत ने बताया कि कार्यक्रम का समापन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें स्थानीय लोगों ने पारंपरागत संस्कृति के विभिन्न रंगों को दिखाया। उनके रंगों और कल्पना की दुनिया ने सबका मन मोह लिया। उनकी सादगी और उनके भाव ने सबको मोहित कर लिया। बाद स्थानीय चरवाहों का सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में लैम्बर्डुंग गांव सहित तवांग क्षेत्र से सटे गांवों से लगभग 100 चरवाहों करीब 400 से अधिक अपने पशुधन याक के साथ हिस्सा लिया। चरवाहे चाचिन चरागाह मैदानों को एतिहासिक मानते हैं। वे आज भी अपने पूर्वजों की थाती को, अपनी संस्कृति और विरासत को भावात्मक रूप से संभाले हुए हैं, निभाते चले आ रहे हैं। भारतीय सेना और नागरिक प्रशासन ने इसके आयोजन में काफी सराहनीय भूमिका निभाई, जिसकी लोगों ने प्रशंसा की।

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