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तरुण गोगोई: असम को विकास के पथ पर लौटाने वाले सच्चे कांग्रेसी
Tue, 24 Nov 2020 04:17 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, गुवाहाटी
एजेंसी, गुवाहाटी
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 24 Nov 2020 04:17 AM IST
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तरुण गोगोई (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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असम के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने एक बार कहा था कि वह कांग्रेसी हैं और जीवन की अंतिम सांस तक कांग्रेसी ही रहेंगे। वह अपने इन शब्दों पर मरते दम तक कायम रहे। सोमवार को गोगोई का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। 2001 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने वाले कांग्रेस नेता ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि वह पांच साल तक सीएम बने रहेंगे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी लोकप्रियता इस कदर हो जाएगी कि वह लगातार तीन बार मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की सेवा करेंगे।
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गोगोई ने हमेशा आगे बढ़कर असम का नेतृत्व किया। उल्फा समेत कई उग्रवादी संगठनों को वार्ता की टेबल पर लाने का श्रेय गोगोई को ही जाता है। असम को भ्रष्टाचार के जाल से निकालकर विकास के पथ पर लाने का काम भी गोगोई ने किया। 2001 में जब गोगोई ने असम गण परिषद से सत्ता अपने हाथों में ली तो उन पर राज्य को उग्रवाद व वित्तीय अस्थिरता से निकालने की बड़ी जिम्मेदारी थी।
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असम भारी-भरकम कर्ज तले दबा था। स्थिति इतनी खराब थी कि सरकारी कर्मचारियों को उनका वेतन तक समय पर नहीं मिल पा रहा था। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी देखे। गोगोई जब तीसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उन्हें पार्टी के भीतर असंतोष झेलना पड़ा। इसका नतीजा रहा कि 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इस असंतोष का नेतृत्व गोगोई के करीबी हिमंता बिस्व सरमा ने किया, हालांकि इसके बावजूद गोगोई अपने पद पर बन रहे। बाद में सरमा ने भाजपा का दामन थाम लिया और अपने साथ नौ विधायकों को भी ले गए। इससे गोगोई और कांग्रेस को बड़ा झटका लगा।
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जवाहर लाल नेहरू से थे प्रभावित
तरुण गोगोई देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से बेहद प्रभावित थे। 1952 में नेहरू ने जोरहट का दौरा किया था, तब गोगोई दसवीं कक्षा में थे। तभी से उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। गोगोई भारत युवक समाज, असम के सक्रिय सदस्य थे और 1963 में कांग्रेस में शामिल हुए। तभी से वह कांग्रेस के प्रति निष्ठावान रहे। उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी का हमेशा समर्थन किया।
पिता बनाना चाहते थे डॉक्टर
असम के जोरहट जिले में एक अप्रैल, 1936 को कमलेश्वर गोगोई और ऊषा गोगोई के घर जन्में तरुण गोगाई को उनके पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन उनकी रुचि राजनीति में थी। स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद गोगोई ने जगन्नाथ बरुआ कॉलेज में राजनीति विज्ञान में दाखिला लिया। स्नातक के बाद उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में लॉ में दाखिला लिया, लेकिन वहां बीमार पड़ गए। इसके बाद वह असम लौटे और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली।
1971 में पहली बार बने सांसद
गोगाई ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1968 में जोरहट निकाय चुनाव में जीत दर्ज की। गोगोई 1971 में पहली बार जोरहाट लोकसभा सीट से चुने गए। 1971 से 1984 तक वह यहां से लगातार सांसद रहे। इसके बाद 1991-96 तक और 1998 से 2000 तक कलियाबोर से लोकसभा सांसद रहे। 2001 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तीताबार सीट से चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की। 2006 और 2011 के विधानसभा चुनावों में भी उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने राज्य में धमाकेदार जीत दर्ज की और तरुण गोगोई ने अपने नाम सबसे लंबे समय तक (18 मई 2001 से 24 मई 2016) राज्य का मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है।