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'नो कास्ट-नो रिलिजन' प्रमाणपत्र पाने वाली देश की पहली महिला बनीं स्नेहा, 9 साल किया संघर्ष

Mon, 18 Feb 2019 06:24 AM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: Avdhesh Kumar Updated Mon, 18 Feb 2019 06:24 AM IST
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Tamil Nadu woman Sneha gets No Cast, No Religion Certificate
स्नेहा प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए - फोटो : Social Media

तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के तिरूपत्तूर की रहने वाली 35 वर्षीय वकील स्नेहा 'नो कास्ट, नो रिलिजन' सर्टिफिकेट पाकर देश की पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिसका आधिकारिक तौर पर कोई धर्म, कोई जाति नहीं है। स्नेहा यह प्रमाणपत्र पाने के लिए पिछले नौ साल से संघर्ष कर रही थीं। 

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बीती पांच फरवरी को नौ साल के अदालती संघर्ष के बाद 35 वर्षीया स्नेहा ने यह लड़ाई जीती। पेशे से वकील स्नेहा बताती हैं कि जब भी वह फॉर्म भरने के समय जाति और धर्म के बॉक्स के कॉलम को देखती थीं तो उन्हें एहसास होता था कि मेरी पहचान क्या जाति और धर्म से ही होगी। स्नेहा स्कूल समय से ही जाति, धर्म का कॉलम खाली छोड़ देती थीं। उनके हर प्रमाण पत्र में जाति, धर्म रिक्त रहा है। उनका कहना है कि उनकी पहचान सिर्फ भारतीय के रूप में हो।  
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स्नेहा ने 2010 में अपनी लड़ाई शुरू की थी, लेकिन उनके सभी प्रयास निरर्थक रहे। कारण कि आधिकारिक तौर पर देश में कोई ऐसी मिसाल नहीं होने के आधार पर ठुकरा दिया जाता था।  स्नेहा का कहना है कि उनके परिवार ने हमेशा उसके इस निर्णय का समर्थन किया।

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