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तमिलनाडु के मछुआरे का कमाल, अपने समुदाय के लिए तैयार किया देश का पहला 'रेडियो चैनल'
Tue, 03 Nov 2020 05:27 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामनाथपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामनाथपुरम
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 03 Nov 2020 05:27 PM IST
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Fisherman radio channel
- फोटो : ANI
तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के एक मछुआरे ने अपने समुदाय के लिए देश का पहला रेडियो चैनल स्थापित कर दिया है। आर्मस्ट्रांग फर्नांडो नाम के मछुआरे ने 'कदल ओसई एफएम 90.4' शुरू किया है, जो मछुआरों के लिए भारत का पहला और एकमात्र रेडियो चैनल है।
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पम्बन के आर्मस्ट्रांग फर्नांडो बचपन से ही रेडियो सुनने के शौकीन थे। फर्नांडो ने 8 वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। उनका मछली का कारोबार है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए समर्पित रेडियो चैनल सुनने के बाद उनके मन में विचार आया कि अगर किसान के लिए रेडियो चैनल स्थापित किया जा सकता है तो मछुआरों के लिए क्यों नहीं? इसके बाद ही उन्होंने इस चैनल को स्थापित किया।
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उन्होंने इस चैनल के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा चैनल विशेष रूप से हमारे समुदाय को समर्पित है, जिसमें हम महिलाओं के लोक गीत, मछुआरों के संगीत एवं हमारे क्षेत्र से संबंधित कार्यक्रमों को प्रस्तुत करते हैं।
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Nearly 80% population of Pamban is engaged in fishing. It was launched to help them. Our transmission range is 5-10 km now. Govt should increase the range & pave way for it to be broadcast across Pamban island: Armstrong Fernando, Director and founder of 'Kasal Osai FM 90.4' https://t.co/sj7jfeedlm pic.twitter.com/em1SxWN2ED
— ANI (@ANI) November 2, 2020
आर्मस्ट्रांग ने कहा कि पंबन की लगभग 80 फीसदी आबादी मछली पकड़ने में लगी हुई है। यह उनकी मदद के लिए शुरू किया गया था। हमारी ट्रांसमिशन रेंज अब 5-10 किलोमीटर है। सरकार को पम्बन द्वीप में इसे प्रसारित करने के लिए मजबूत ढांचा बनाना चाहिए।
12 कर्मचारी करते हैं काम
आर्मस्ट्रांग ने बताया कि स्टेशन प्रबंधक गायत्री के अलावा, स्टेशन के 12 अन्य कर्मचारी अंशकालिक मछुआरे या उनके परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से छात्रों, गृहिणियों और मछुआरों को शहर में होने वाली दैनिक घटनाओं के बारे में पता चलता है, क्योंकि यह चैनल स्थानीय समुदाय को लाभान्वित करता है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार और समुदाय के बीच एक सीधी कड़ी के रूप में भी काम करता है ताकि मछली पकड़ने के लिए सरकारी प्रोत्साहन प्राप्त करने से लेकर लोगों की समस्याओं को जल्दी से हल किया जा सके।