दुनिया की कोई भी ताकत हमसे कश्मीर नहीं छीन सकती: राजनाथ
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कश्मीर के हालात के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उसे कड़ा संदेश दिया कि दुनिया की कोई ताकत हमसे कश्मीर नहीं छीन सकती। उन्होंने कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तान की कोशिश के जवाब में कहा कि पाकिस्तान से अब बातचीत कश्मीर पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर होगी।
राज्यसभा में कश्मीर पर चर्चा के दौरान एक प्रस्ताव पारित कर हिंसा में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए विश्वास बहाली का संकल्प लिया गया। इस दौरान गृह मंत्री ने इस मुद्दे पर 12 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाने और समस्या सुलझाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की घोषणा की।
हिजबुल के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर घाटी में जारी हिंसा और अशांति पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान की धरती पर पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
देश की धरती पर देश विरोधी नारों को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्थिति सामान्य होने पर कश्मीर घाटी को सेना के हवाले करने की संभावनाओं को भी ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्या के राजनीतिक हल के लिए ठोस उपाए किए जा रहे हैं।
इससे पहले राज्यसभा में कश्मीर की स्थिति पर करीब 7 घंटे की मैराथन चर्चा हुई। विपक्ष ने सरकार पर स्थिति को ठीक से नियंत्रित न करने का आरोप लगाया। ज्यादातर सदस्यों ने पिलेट गन के व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जाहिर की।
चर्चा का जवाब देते हुए एक तरफ राजनाथ ने खासतौर पर पाकिस्तान पर निशाना साधा तो दूसरी ओर कश्मीर में लग रहे भारत विरोधी नारों और आतंकी संगठन आईएस का झंडा लहराने के मामले में भी कड़ी चेतावनी दी।
राजनाथ ने इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान ‘उस दिन का इंतजार है जब कश्मीर हमारा होगा’ और पाकिस्तान द्वारा जनमत संग्रह की मांग का भी जिक्र किया। इस दौरान पाकिस्तान से बातचीत पर अपना रुख बदलते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब उससे कश्मीर पर नहीं बल्कि अब सिर्फ पीओके पर बात करेगा।
भारत विरोधी नारेबाजी पर चेतावनी
राजनाथ ने इस दौरान कश्मीर की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए मारे गए और घायल हुए लोगों के प्रति संवेदना तो व्यक्त की, मगर दो टूक शब्दों में कहा कि देश की धरती पर देश विरोधी नारेबाजी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कश्मीर में आतंकी संगठन आईएस के झंडे लहराए जाते हैं, जबकि यह संगठन दूसरे धर्मों की ही नहीं, अपने धर्म के लोगों की भी निर्मम हत्या करता है।
सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगे पीएम मोदी
गृह मंत्री ने विपक्ष की सर्वदलीय बैठक की मांग को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक 12 अगस्त को 12 बजे होगी। बैठक में प्रधानमंत्री भी शिरकत करेंगे।
पिलेट गन पर एहतियात बरतने के निर्देश
गृह मंत्री ने इससे पहले भी पिलेट गन के उपयोग की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हालांकि सरकार ने सुरक्षा बलों को इसके उपयोग पर अधिकतम एहतियात बरतने का निर्देश दिया है। लेकिन देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों के धैर्य का ही नतीजा रहा कि हिंसा में सुरक्षा बलों के 4515 जवान घायल हुए, जबकि घायल आम नागरिकों की संख्या इससे कम 3356 है।
प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित
चर्चा के अंत में विभिन्न राजनीतिक दलों के 29 राज्यसभा सदस्यों ने कश्मीर मसले पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव मंजूर किया। प्रस्ताव में कहा गया, ‘सदन कश्मीर घाटी में लंबे समय से जारी उपद्रव, हिंसा और कर्फ्यू पर चिंता व्यक्त करता है। सदन वहां मारे गए और घायल हुए लोगों के प्रति संवेदना और चिंता भी व्यक्त करता है। सदन राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी तरह का समझौता नहीं करने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ है। घाटी के लोगों की पीड़ा कम करने के लिए कानून-व्यवस्था और शांति बहाली की खातिर अत्यावश्यक कदम उठाना जरूरी है। सदन कश्मीर समाज के सभी वर्गों से विनम्र अपील करता है कि जितनी जल्दी हो सके, वे सामान्य स्थिति और सौहार्द की बहाली में योगदान करें। सदन घाटी की आम जनता और खासकर युवाओं में विश्वास बहाली के लिए सर्वसम्मति से संकल्प लेता है।’