भारत-स्विट्जरलैंड संबंध: एआई से व्यापार तक बढ़ेगी साझेदारी, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद क्या बोले पार्मेलिन?
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति पार्मेलिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने भारत को वैश्विक शासन और भू-राजनीति में बढ़ती भूमिका वाला महत्वपूर्ण भागीदार बताया।
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दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद पार्मेलिन ने कहा, "यह बैठक स्विट्जरलैंड और भारत के बीच उत्कृष्ट संबंधों को दर्शाती है, जो आपसी सम्मान, विश्वास और मजबूत आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं। यह महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दोहराने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।"
वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर क्या बोले पार्मेलिन?
पार्मेलिन ने कहा कि भारत वैश्विक शासन में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में उभर रहा है और भू-राजनीतिक स्तर पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। पार्मेलिन ने कहा कि दुनिया में बढ़ते विखंडन के बीच स्विट्जरलैंड संवाद और सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रिय भूमिका को महत्व देता है।
Delhi | President of the Swiss Confederation Guy Parmelin says, "India is becoming a key actor in global governance and plays an increasingly important role geopolitically. Considering the growing fragmentation, Switzerland values India’s commitment to dialogue and cooperation, as well as its active engagement in international forums. For us, close and dynamic partnerships with important actors like India are essential to strengthen multilateral cooperation and to address global challenges together. India’s hosting of the AI Impact Summit in New Delhi in February 2026 is just one example of its leading role in addressing emerging issues. Switzerland is pleased to build on this engagement by hosting the next AI Summit in June 2027..." (file pic)
— ANI (@ANI) October 5, 2026
उन्होंने कहा, "हमारे लिए भारत जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ करीबी और गतिशील साझेदारी बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए जरूरी है।"
भारत में एआई इंपैक्ट समिट की मेजबानी का किया जिक्र
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति ने फरवरी 2026 में नई दिल्ली में भारत की ओर से आयोजित एआई इंपैक्ट समिट का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे उभरते मुद्दों से निपटने में भारत की भूमिका का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड जून 2027 में अगले एआई समिट की मेजबानी करके इस जुड़ाव को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है।
पार्मेलिन ने कहा कि भारत की ओर से आयोजित एआई इंपैक्ट समिट 2026 स्विट्जरलैंड के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत से दोनों देशों की प्राथमिकताओं में नजदीकी की पुष्टि हुई।
उन्होंने कहा, "जब हम 2027 में जिनेवा में अगले शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी कर रहे हैं, भारत हमारे लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है। हम दोनों शिखर सम्मेलनों और उसके बाद भी निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
'ग्लोबल साउथ की आवाज को बढ़ाने में भारत की अहम भूमिका'
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने वैश्विक तकनीकी चर्चाओं में उन आवाजों को सामने लाने में नेतृत्व दिखाया है, जिन्हें अब तक पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। इसमें खास तौर पर वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज शामिल है। उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड अंतरराष्ट्रीय गणना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता नेटवर्क के माध्यम से इस दिशा में आगे बढ़ेगा। यह नेटवर्क तकनीकी लाभों के समान वितरण को बढ़ावा देने के साथ सभी क्षेत्रों में ज्ञान साझा करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है।
पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड फिलहाल 2027 के कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन के विषयों को अंतिम रूप दे रहा है और प्रमुख साझेदारों के साथ सहयोग के संभावित तरीकों पर विचार कर रहा है। उन्होंने जिनेवा में होने वाले सम्मेलन में भारत की भागीदारी की उम्मीद जताई।
भारत-ईएफटीए समझौते को लेकर क्या कहा?
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के क्रियान्वयन को लेकर भी पार्मेलिन ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मैं इस समझौते के क्रियान्वयन का आकलन बहुत सकारात्मक रूप से करता हूं। इसके लागू होने के बाद से कंपनियों की टीईपीए में रुचि काफी मजबूत रही है।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में टीईपीए भारत और स्विट्जरलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा। पार्मेलिन ने कहा कि टीईपीए केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरे और दीर्घकालिक आर्थिक संबंधों के लिए परिस्थितियां बनाने में मदद कर सकता है। इससे दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलने, रोजगार पैदा होने और नवाचार तथा टिकाऊ विकास में योगदान की उम्मीद है।
दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है टीईपीए
उन्होंने कहा कि निवेश पर मजबूत जोर के कारण टीईपीए दोनों देशों के लिए लाभकारी स्थिति पैदा कर सकता है। पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड में वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनियां, विशेषज्ञ तकनीक, मजबूत नवाचार क्षमता और निवेश के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण मौजूद है। वहीं, भारत के पास बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था, गतिशील आर्थिक व्यवस्था, कुशल कार्यबल और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में लगातार बढ़ती भूमिका है।