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असम की पहली ट्रांसजेंडर जज ने संभाला काम, कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद करवाई थी सर्जरी

Sun, 15 Jul 2018 03:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Updated Sun, 15 Jul 2018 03:43 PM IST
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Swati Bidhan Baruah become the first in Assam and third transgender judge in India
स्वाति बरुआ

ट्रांसजेंडर को जज बनाने के मामले में असम पूर्वोत्तर का पहला और देश का तीसरा राज्य बन गया है। स्वाति बरुआ ने शनिवार को गुवाहाटी के कामरूप जिले में बनीं लोक अदालत का काम संभाला। अदालत की 20 जजों वाली बेंच में से स्वाति एक हैं। साल 2012 तक स्वाति एक पुरुष बिधान हुआ करती थीं। इसके बाद उन्होंने सर्जरी करवाई और लड़के से लड़की बन गईं और अपना नाम स्वाति रख लिया।

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स्वाति ने बीकॉम के बाद कानून की पढ़ाई की और अब अदालत में पैसों के लेन-देन से जुड़े मामलों को देखेंगी। आसाम से पहले पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में किसी ट्रांसजेडर को जज बनाया जा चुका है। सबसे पहले पश्चिम बंगाल ने साल 2017 में जॉयता मंडल को जज बनाया था। इसके बाद महाराष्ट्र में फरवरी 2018 को नागपुर की लोक अदालत में जज की कुर्सी पर बैठाया गया।
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ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता स्वाति बरुआ द्वारा जज की कुर्सी तक पहुंचने की यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं है। 2012 में स्वाति (तब बिधान) ने अपनी नई पहचान को अपनाते हुए सर्जरी करने का फैसला लिया था। हालांकि उनका परिवार इसके विरोध में आ गया। स्वाति उस समय मुंबई में नौकरी कर रही थीं तभी परिवार ने जबर्दस्ती उन्हें गुवाहाटी वापस बुला लिया। नौकरी करके उन्होंने सर्जरी के लिए पैसे जुटाए थे।
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स्वाति अपनी सर्जरी ना करवा सके इसके लिए परिवार ने उनके बैंक अकाउंट को ही ब्लॉक करवा दिया। जिसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने उनके हक में फैसला दिया और जिसके बाद उनकी सर्जरी का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद बिधान स्वाति बन गईं। अब उनके परिवार को उनसे कोई गिला नहीं है।


स्वाति ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जज के तौर पर मेरी नियुक्ति लोगों को यह अहसास दिलाएगी कि ट्रांसजेंडर भी समाज का एक हिस्सा होते हैं। कुछ नीतियों के असफल होने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, वरना ट्रांसजेंडर भी समाज के लिए काम कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार आसाम में 5 हजार से ज्यादा ट्रांसजेंडर्स हैं। इसी वजह से स्वाति ने 2017 में गुवाहाटी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।'

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