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गंगा की कायाकल्प कर रहा पीएम मोदी का स्वच्छ भारत अभियान
amarujala.com, Written by: संजय मिश्र
Updated Wed, 17 May 2017 07:38 PM IST
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गंगा की कायाकल्प कर रहा पीएम मोदी का स्वच्छ भारत अभियान
- फोटो : अमर उजाला
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पीएम मोदी का स्वच्छ भारत अभियान गंगा की कायाकल्प करता नजर आ रहा है। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने का पीएम का अभियान बेशक धरातल पर नहीं उतर सका है। मगर उनके स्वच्छ भारत अभियान ने गंगा की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के तहत चलने वाले स्वच्छ भारत अभियान के हाथों में गंगा किनारे बसे गांवों को खुले में शौच की समस्या से मुक्त कराने जिम्मा था। जिसमें वह सफल होता दिख रहा है। बेहद कम समय में ही स्वच्छ भारत अभियान ने गंगा के करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा गांवों को खुले में शौच की समस्या से मुक्त बना दिया है। अभियान के तहत इन गांवों में भारी संख्या में शौचालय बनवाए गए हैं।
मई या जून माह तक गंगा किनारे बसे गांव हो जाएंगे खुले में शौच से मुक्त
अभियान से जुडे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के विशेष कार्यअधिकारी अक्षय राउत ने अमर उजाला को बताया कि गंगा किनारे बसे गांव मई अथवा जून माह के अंत तक पूरी तरह से खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गंगा को निर्मल बनाने में यह बड़ी कामयाबी होगी। राउत के अनुसार उत्तराखंड, यूपी, बिहार, क्षारखंड और पश्चिम बंगाल सरीखे 5 राज्यों से होकर गंगा बहती है। इन 5 राज्यों के 52 जिलों में 4500 गांव गंगा के किनारे बसे हैं। इन गांवों में शौचालय का अभाव होने की वजह से मल एवं गंदा जल सीधे गंगा में बहता था। गंगा के प्रदूषित होने में खुले में शौच की समस्या का भी महत्वपूर्ण योगदान था। अब सरकार के पहल से गंगा किनारे के गांव खुले में शौच से मुक्त हो जाएंगे।
4100 गांव हो चुके हैं खुले में शौच से मुक्त
गंगा किनारे बसे 4500 गांवों में से 4100 गांव खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो चुके हैं। राउत के अनुसार यूपी और पश्चिम बंगाल के कुछ गांवों में शौचालय बनाने का कार्य अभी बाकी है। जोकि मई के अंत या जून माह तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि गांवों में बनने वाले शौचालय की निगरानी अंतराष्ट्रीय स्तर की निगरानी एजेंसी से कराई जा रही है। 2000 गांवों के शौचालयों में निगरानी का कार्य संपन्न हो गया है। संतुष्टि के बाद ही गांव को खुले में शौच से मुक्त का दर्जा प्रदान किया जाता है। अभियान की शुरूआत पीएम मोदी ने अक्टूबर 2014 में की थी।
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गंगा किनारे के गांवों में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन पर जोर
स्वच्छ भारत अभियान के तहत गंगा किनारे के गांवों में शौचालय बनाने के साथ इन गांवों में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। गांव वालों को इसका प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें तकनीक प्रदान किया जा रहा है।
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मई या जून माह तक गंगा किनारे बसे गांव हो जाएंगे खुले में शौच से मुक्त
अभियान से जुडे पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के विशेष कार्यअधिकारी अक्षय राउत ने अमर उजाला को बताया कि गंगा किनारे बसे गांव मई अथवा जून माह के अंत तक पूरी तरह से खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि गंगा को निर्मल बनाने में यह बड़ी कामयाबी होगी। राउत के अनुसार उत्तराखंड, यूपी, बिहार, क्षारखंड और पश्चिम बंगाल सरीखे 5 राज्यों से होकर गंगा बहती है। इन 5 राज्यों के 52 जिलों में 4500 गांव गंगा के किनारे बसे हैं। इन गांवों में शौचालय का अभाव होने की वजह से मल एवं गंदा जल सीधे गंगा में बहता था। गंगा के प्रदूषित होने में खुले में शौच की समस्या का भी महत्वपूर्ण योगदान था। अब सरकार के पहल से गंगा किनारे के गांव खुले में शौच से मुक्त हो जाएंगे।
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4100 गांव हो चुके हैं खुले में शौच से मुक्त
गंगा किनारे बसे 4500 गांवों में से 4100 गांव खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो चुके हैं। राउत के अनुसार यूपी और पश्चिम बंगाल के कुछ गांवों में शौचालय बनाने का कार्य अभी बाकी है। जोकि मई के अंत या जून माह तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि गांवों में बनने वाले शौचालय की निगरानी अंतराष्ट्रीय स्तर की निगरानी एजेंसी से कराई जा रही है। 2000 गांवों के शौचालयों में निगरानी का कार्य संपन्न हो गया है। संतुष्टि के बाद ही गांव को खुले में शौच से मुक्त का दर्जा प्रदान किया जाता है। अभियान की शुरूआत पीएम मोदी ने अक्टूबर 2014 में की थी।
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गंगा किनारे के गांवों में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन पर जोर
स्वच्छ भारत अभियान के तहत गंगा किनारे के गांवों में शौचालय बनाने के साथ इन गांवों में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। गांव वालों को इसका प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें तकनीक प्रदान किया जा रहा है।