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सुवेन्दु अधिकारी के पिता बोले : हम तृणमूल के सांसद पर पता नहीं आगे क्या होगा 

Sat, 13 Mar 2021 11:02 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 13 Mar 2021 11:02 PM IST
सार

  • दल-बदल कानून को देखिए, हमने तो पार्टी विरोध में कुछ नहीं किया
  • हमारा दो (सुवेन्दु, सौम्येन्दु) लड़का भाजपा में चला गया
  • अब तो बंगाल में मोदी आएगा

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Suwendu Adhikaris father said:  I am Trinamool MP, but do not know what will happen next
शिशिर अधिकारी - फोटो : self

विस्तार

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में रचे बसे कुछ राजनीतिक परिवारों में अधिकारी परिवार का नाम आता है। इसके मुखिया हैं 80 साल के लोकसभा सांसद शिशिर अधिकारी। ग्राम पंचायत, नगर पालिका, विधानसभा से लेकर संसद भवन तक उन्होंने सफर तय किया है। वे भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पिता हैं। शिशिर अधिकारी का कहना है कि हम तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं, लेकिन आगे क्या होगा यह पता नहीं है?

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तीन बार सांसद चुने गए, मनमोहन सरकार में मंत्री रहे
वर्ष 2009,2014,2019 के तीनों लोकसभा चुनाव में कांथी सीट जीतने वाले शिशिर तृणमूल कोटे से यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं। भाजपा नेता, नंदीग्राम के प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी के पिता हैं। सुवेंदु के भाई दिव्येन्दु अधिकारी तामलुक लोकसभा सीट से सांसद हैं। क्षेत्र की नगरपालिका, नगर पंचायत पर अधिकारी परिवार का सिक्का चलता है। 
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जब से बेटा भाजपा में गया तृणमूल वाले बात नहीं करते
अमर उजाला से विशेष बातचीत में शिशिर साफ कहते हैं कि जब से उनका लड़का (सुवेन्दु,सौमेन्दु) भाजपा में गया है, तृणमूल के लोग उनके बात नहीं करते, मीटिंग में नहीं बुलाते। संपर्क कटा हुआ है। शिशिर अधिकारी ही नहीं पुत्र सुवेन्दु भी 2009-16 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा सदस्य, 2016 के उपचुनाव में लोकसभा सदस्य और 2019 में फिर लोकसभा सदस्य चुने गए। उनके भाई और सांसद सुवेन्दु अधिकारी 2009 में तामलुक लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे। उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया और पश्चिम बंगाल विधानसभा का रुख किया। तब तामलुक सीट से दिव्येन्दु चुनकर लोकसभा में आ गए थे। आगे शिशिर अधिकारी से सुनिए-

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आप किस पार्टी के सांसद हैं?

इस सवाल पर शिशिर अधिकारी साफ कहते हैं कि वह और उनके बेटे दिव्येंदु अधिकारी तृणमूल के सांसद हैं। आप दल-बदल विरोधी कानून देख लीजिए, उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है कि इसके दायरे में आएं। लेकिन उन्हें नहीं पता कि अभी वह किस दल में हैं और आगे क्या होगा? शिशिर अधिकारी कहते हैं कि जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। इसलिए उन्हें आने वाले समय की चिंता नहीं है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल और भाजपा में कड़ा मुकाबला हो रहा है। दो मई के बाद सबको पता चल जाएगा कि बंगाल में क्या हुआ?

तृणमूल या भाजपा में किसका प्रचार कर रहे हैं?
तृममूल कांग्रेस के सांसद ने इस सवाल का कोई सीधा उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 का दौर चल रहा है। उनकी उम्र 80 साल की है। इसलिए घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। उनके पुत्र सांसद दिव्येन्दु भी नहीं। जबकि सुवेन्दु नंदीग्राम से अपने विधानसभा चुनाव प्रचार और भाजपा की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। सौम्येन्दु भी। शिशिर का कहना है कि वह और दिव्येन्दु किसी का प्रचार नहीं कर रहे हैं और न ही जनता से अभी किसी को वोट देने की अपील जारी किए हैं।  

किसको वोट देंगे?
तृणमूल के सांसद हैं और बेटा भाजपा का उम्मीदवार। हल्दिया जिले में भी शिशिर अधिकारी परिवार की अच्छी राजनीतिक धमक है, लेकिन वोट देने के सवाल पर कहते हैं कि जिसको विवेक (मनोदशा) कहेगी। अभी कुछ तय नहीं है। मतदान का समय नजदीक आने पर जो विवेक कहेगा, उसकी ही सुनेंगे।

पश्चिम बंगाल में दो मई को क्या नतीजा आएगा?

तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर जनता वोट देने का मन बना चुकी है। राज्य में प्रधानमंत्री मोदी के नाम चल रहा है और वहीं आएंगे। शिशिर अधिकारी कहते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अच्छी और लड़ाकू नेता हैं, लेकिन पिछले दस सालों में धीरे-धीरे तृणमूल की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। अधिकारी का कहना है कि नारदा, शारदा, कोयला घोटाले समेत हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार ने सरकार और ममता की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। हिंसा समेत तृणमूल के पराभव के तमाम कारण हैं।

शिशिर से किस मुंह से बात करे तृणमूल?
तृणमूल के नेता पार्थ चटर्जी कहते हैं कि शिशिर से किस मुंह से बात करें। पार्थ के मुताबिक उनके बेटे सुवेंदु और सौम्येंदु भाजपा में हैं। सुवेन्दु तृणमूल से बागी होकर नंदीग्राम से चुनाव लड़ रहे हैं। शिशिर पार्टी के सांसद और वरिष्ठ नेता हैं। उनके मन में और जुबान पर दो अलग-अलग चीजें चल रही हैं। उन्हें तय करने दीजिए कि यह क्या हैं?
तृणमूल के ही एक अन्य नेता का कहना है कि राजनीति में ही ढोंग के साथ सब चलता है। शिशिर अधिकारी के मन में अब भाजपा जगह बना चुकी है। इसलिए बहुत कुछ कहने-सुनने की गुंजाइश नहीं है। अब दो मई का ही सबको इंतजार है।

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