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West Bengal: CM ममता बनर्जी के बाद सुवेंदु अधिकारी ने भी चुनाव आयुक्त को लिखा पत्र, एसआईआर जारी रखने की अपील

Mon, 05 Jan 2026 12:29 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Mon, 05 Jan 2026 12:29 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद  मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को जारी रखने का आग्रह किया।

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Suvendu Adhikari also wrote a letter to the Election Commissioner requesting continuation of SIR
नेता सुवेंदु अधिकारी - फोटो : facebook

विस्तार

पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को एसआईआर प्रक्रिया को जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कर की। सुवेंदु का यह आग्रह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आग्रह के दो दिन बाद किया है। मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को रोकने का आग्रह किया था।

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एसआईआर को रोकना, हार स्वीकार करने से कम नहीं-अधिकारी

अधिकारी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को रोकने का आह्वान हार स्वीकार करने से कम नहीं है। यह चुनावी कदाचार को जारी रखने का एक बेशर्म प्रयास है, जिसने उनके कार्यकाल को परिभाषित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बनर्जी की शिकायतों की लंबी सूची न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि यह जानबूझकर किया गया है, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर बदनाम करना और व्यापक असुविधा और मताधिकार से वंचित होने की झूठी कहानी गढ़ना है।

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एसआईआर को आशा की किरण के रूप में अपनाया- अधिकारी

उन्होंने एक्स पर पत्र साझा कर लिखा कि इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल की जनता ने एसआईआर को आशा की किरण के रूप में अपनाया है। चिंता और उत्पीड़न की उनकी कहानी टीएमसी द्वारा रची गई एक छलावा है, जो उन लोगों के समर्थन की गूंज में दब गई है जो उनकी संरक्षणवादी राजनीति को अस्वीकार करते हैं और मतपत्र की पवित्रता को प्राथमिकता देते हैं। अनुचित जल्दबाजी और अपर्याप्त तैयारी के आरोपों को खारिज करते हुए, अधिकारी ने कहा कि राज्य में 50,000 से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को पुनरीक्षण अभ्यास के लिए प्रशिक्षण दिया गया था।

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उन्होंने तत्काल स्पष्टीकरण के लिए व्हाट्सएप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग का बचाव करते हुए उन्हें औपचारिक परिपत्रों का पूरक और आधुनिक प्रशासनिक प्रथाओं के अनुरूप बताया। दूसरी ओर, भाजपा नेता ने राज्य प्रशासन और टीएमसी सदस्यों पर जमीनी अधिकारियों को डरा-धमकाकर और गलत सूचना फैलाकर एसआईआर को पटरी से उतारने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने और प्रक्रिया के दौरान कैडर के नेतृत्व में व्यवधान को रोकने के लिए कुछ सुनवाईयों से बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को बाहर रखना आवश्यक था।

दो दिन पहले ममता ने एसआईआर को रोकने का ् आग्रह किया

इसके साथ ही उन्होंने कहा  "मैं चुनाव आयोग से आग्रह करता हूं कि वह लोकतांत्रिक जनता के अटूट समर्थन से प्रेरित होकर निडरतापूर्वक एसआईआर को आगे बढ़ाए। यह प्रक्रिया संविधान पर हमला नहीं बल्कि उसकी सच्ची पुष्टि है, जो हमारे चुनावों पर लंबे समय से छाए अंधकार को दूर करती है।" 3 जनवरी को ममता बनर्जी ने पत्र लिखकर राज्य में मनमानी और त्रुटिपूर्ण एसआईआर को रोकने का आग्रह किया। इसके साथ ही चेतावनी दी कि वर्तमान स्वरूप में इसका जारी रहना बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने और "लोकतंत्र की नींव पर प्रहार" को जन्म दे सकता है।

 

 

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