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कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय संस्था में नहीं जा सकता पाक: सुषमा स्वराज
शशिधर पाठक
Updated Tue, 06 Jun 2017 08:44 AM IST
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सुषमा स्वराज
- फोटो : PTI
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पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को लेकर किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था में नहीं जा सकता। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने काफी सख्त शब्दों में शिमला समझौता और लाहौर घोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि भारत का कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय(आईसीजे) में जाना बिल्कुल अलग मामला है। यह विएना संधि के उल्लंघन से जुड़ा मामला है और इससे कश्मीर के मुद्दे की तुलना गलत है। सुषमा स्वराज ने कहा कि दोनों देश(भारत और पाकिस्तान) शिमला समझौता तथा लाहौर घोषणा पत्र से बंधे हुए हैं।
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विदेश मंत्री ने कहा कि यह दोनों दस्तावेज दोनों देशों को आपसी मुद्दों को द्विपक्षीय तरीके से निबटाने के लिए बाध्यकारी बनाते हैं। स्वराज ने साफ कहा कि यह समझौता पाकिस्तान को न तो आईसीजे में जाने की इजाजत देता है और नहीं पाकिस्तान किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्था में जा सकता है। विदेश मंत्री ने कहा कि कुलभूषण जाधव का मामला विएना कनवेंशन के उल्लंघन से जुड़ा है और इस मामले में पाकिस्तान को भारतीय राजनयिकों की जाधव तक पहुंच देनी होगी। यह अनिवार्य है।
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विदेश नीति के तीन पिलर
एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री ने भारत की पाकिस्तान के साथ विदेश नीति भी समझाई। सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान के हमारी नीति के तीन पिलर हैं। पहला यह कि दोनों देश बातचीत के जरिए आपसी मुद्दे सुलझाएंगे। दूसरा, बातचीत भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय ही होगी। तीसरा और अंतिम सूत्र वाक्य यह है कि आतंकवाद और वार्ता दोनों साथ-साथ नहीं चल सकती। विदेश मंत्री ने कहा कि हम इसी परिप्रेक्ष में आगे बढ़ रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए तैयार है। केन्द्र में एनडीए की सरकार आने के बाद से ही सरकार पाकिस्तान अन्य पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते की पक्षधर थी। इसी उद्देश्य से शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों को शामिल होने का न्यौता दिया गया। सभी सार्क सदस्य देश आए भी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को महत्व दिया। लाहौर गए, लेकिन मिला क्या?
'माहौल तो हो'
नवाज शरीफ
पाकिस्तान के साथ आगे की बातचीत की संभावना पर सुषमा ने कहा कि माहौल तो हो। यह पूछे जाने पर कि जैसे काबुल से पीएम मोदी लाहौर गए थे क्या उसी तरह बड़ा दिल दिखाते हुए आगे की पहल करेंगे? सुषमा स्वराज ने कहा कि इसका माहौल तो हो। मानवीय संबंधों के लिए जगह तो हो, धरातल, वातावरण और स्थिति इसके अनुकूल तो हो। विदेश मंत्री ने कहा कि 2015 में प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को काबुल में थे। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का फोन करके उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। इस दौरान नवाज ने कहा आप काबुल में हैं, दिल्ली जाएंगे और बीच में लाहौर पड़ता है। नवाज ने अपने घर में शादी के कार्यक्रम की सूचना दी और प्रधानमंत्री चले गए। लेकिन इस उदारता का फल क्या मिला। कुछ ही हफ्ते बाद पठानकोट में आतंकी हमला हो गया।
पाकिस्तान बस एक देश
विदेश मंत्री ने वार्षिक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि विदेश मंत्रालय पाकिस्तान को लेकर अधिक ऊर्जा नहीं खर्च करता। भारत की नजरों में प्रमुख देशों की तरह पाकिस्तान भी महज एक देश हैं। जितना समय हम ऐसे अन्य देशों को देते हैं उसी अनुपात में पाकिस्तान को भी समय देते हैं।
पाकिस्तान बस एक देश
विदेश मंत्री ने वार्षिक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि विदेश मंत्रालय पाकिस्तान को लेकर अधिक ऊर्जा नहीं खर्च करता। भारत की नजरों में प्रमुख देशों की तरह पाकिस्तान भी महज एक देश हैं। जितना समय हम ऐसे अन्य देशों को देते हैं उसी अनुपात में पाकिस्तान को भी समय देते हैं।