Sushant Singh Rajput: क्या सीबीआई ढूंढ पाएगी सुशांत की मौत का सच? आरुषि से लेकर व्यापम तक कई बार रही खाली हाथ
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी या फिर उनकी हत्या की गई? देशभर में इंसाफ को लेकर उठी मांग के बाद इस गुत्थी को सुलझाने की जिम्मेदारी सीबीआई को मिली है।सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
सुशांत के परिजनों ने सीबीआई से जांच की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार भी किया और सरकारी एजेंसी ने जांच शुरू भी कर दी है।
मगर सवाल है कि क्या सीबीआई भी सुशांत की मौत के सच को सामने ला पाएगी? या फिर सुशांत का किस्सा भी फाइलों का हिस्सा बन बस इधर-उधर होता रहेगा? सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर पूरे देश को भरोसा है। मामले सुलझाने की बात करें तो उसकी सजा दिलाने की दर 65 से 70 फीसदी तक है। मगर अक्सर राजनीतिक या किसी अन्य दबाव में सीबीआई की जांच पर सवाल भी उठते रहे हैं। उसे 'पिंजरे में बंद तोता' तक करार दिया जा चुका है। ऐसे में आशंका के बादल गहराते हैं। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें सीबीआई बरसों की जांच के बाद भी खाली हाथ ही रही है।
बोफोर्स घोटाला : 60 करोड़ का घोटाला, जांच पर 250 करोड़ खर्च
बोफोर्स तोप की खरीद मामले ने देश की राजनीति में तूफान मचाकर रख दिया था। 1986 में किए गए इस सौदे में 60 करोड़ रुपये की घूस देने की बात उठी। इसके बाद 1989 में कांग्रेस को इसके चलते सत्ता भी गंवानी पड़ी।
22 जनवरी, 1990 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। लंबी प्रक्रिया चली। 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं को बरी किया, लेकिन सीबीआई ने 90 दिन की अवधि में कोई अपील दाखिल नहीं की। 2009 में क्वात्रोकी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी वापस ले लिया गया। 2011 में उसे सीबीआई की ओर से बरी भी कर दिया गया। जांच पर करीब 250 करोड़ रुपये का खर्च आया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
साल 2018 में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में 2005 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी, जिसे शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आपको 13 साल के बाद इसकी याद आई है।
आखिर आरुषि का हत्यारा कौन
12 साल बीत जाने के बाद भी आज तक यह पता नहीं चल सका है कि आखिर आरुषि और हेमराज की हत्या किसने की। 16 मई, 2008 को नोएडा में आरुषि तलवार अपने बेडरूम में मृत पाई गई। शक नौकर हेमराज पर गया, लेकिन अगले दिन उसकी लाश छत पर मिली।
स्थानीय पुलिस से जब मामला सुलझता नहीं दिखा, तो एक जून को केस सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने आरुषि के माता-पिता राजेश और नूपुर तलवार पर उंगली उठाई। साल 2013 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा भी सुनाई। मगर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2017 में दोनों को बरी कर दिया।
इतने साल के बाद सवाल अब भी वही है, आखिर आरुषि और हेमराज का हत्यारा कौन है?
अब तक सामने नहीं आया व्यापम घोटाले का सच
एयरसेल-मैक्सिस 2जी केस
2जी स्पेक्ट्रम केस
2जी स्पेक्ट्रम केस ने मनमोहन सिंह सरकार को हिलाकर रख दिया था। स्पेक्ट्रम आवंटन में गड़बड़ी पर कांग्रेस को संसद में जवाब देना मुश्किल हो गया था। बहुत से मंत्रियों को कई साल तक जेल में रहना पड़ा। सीबीआई ने चार अलग-अलग मामलों में चार्जशीट दायर की, जिसमें लाखों पन्नों के दस्तावेज लगाए। मगर 10 साल की जांच के बाद सभी आरोपी बरी हो गए। सीबीआई इस मामले में किसी एक को भी सजा दिलाने में सफल नहीं हो सकी।
कोयला घोटाला
इन मामलों में भी हुई सीबीआई की किरकिरी
ललित नारायण मिश्रा : आजाद भारत के पहले कैबिनेट मंत्री। 2 जनवरी, 1975 को उन पर बम फेंका गया। उस समय वह रेल मंत्री थे। इंदिरा गांधी के करीबी रहे मिश्रा को घायल होने के बाद 30 मिनट की दूरी पर स्थित दरभंगा अस्पताल न ले जाकर 150 किलोमीटर दूर दानापुर ले जाया गया। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। शव का पोस्टमॉर्टम भी नहीं हुआ। जांच सीबीआई को सौंपी गई, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला।
अमर सिंह चमकीला : मशहूर पंजाबी गायक अमर सिंह चमकीला को 1988 में मंच पर ही गोली मार दी गई थी। उनके साथ सह गायिका को भी गोली मारी गई। उनके गाने उस समय के हिसाब से काफी आधुनिक थे। उनमें लिव इन जैसी बातों का पक्ष था, जिसकी वजह से उन्हें आलोचना झेलनी पड़ती थी। पंजाब पुलिस को जांच में सफलता नहीं मिली तो सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।